अयोध्या/सर्वोदय न्यूज़:- धर्मनगरी Ayodhya के रायगंज स्थित प्रसिद्ध जैन मंदिर में आठ दिवसीय ‘इंद्रधनुष विधान’ अनुष्ठान श्रद्धा और भक्ति के साथ आयोजित किया जा रहा है। आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु भाग ले रहे हैं, जिससे मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है।
इंद्र स्वरूप बनकर करते हैं ध्वज अर्पण
विधान की खासियत यह है कि इसमें सहभागी बनने वाले श्रद्धालुओं को ‘इंद्र’ की संज्ञा दी जाती है। वे इंद्र स्वरूप में मंडल पर ध्वज अर्पित करते हैं, इसलिए इसे ‘इंद्रध्वज विधान’ भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस विधान के माध्यम से तीन लोक के समस्त चौतालों और 458 कृत्रिम जिनालयों की सामूहिक पूजा की जाती है।
अनुष्ठान के दौरान प्रतिदिन पांच मेरुओं की आराधना होती है और प्रत्येक दिन एक मेरु का विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया जा रहा है।
आध्यात्मिक जागरण का माध्यम
जैन मंदिर के पीठाधीश्वर Ravindra Kirti Maharaj ने बताया कि यह विधान आत्मकल्याण, पुण्य संचय और आध्यात्मिक चेतना के जागरण का महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में संयम, संस्कार और धार्मिक मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं।
गणिनी ज्ञानमती माताजी का सानिध्य
यह आयोजन जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी Ganini Gyanmati Mataji के सानिध्य में संपन्न हो रहा है। कार्यक्रम का संचालन दिल्ली के आनंद प्रकाश जैन अपने पुत्रों मदन, प्रदीप और प्रवीण जैन के सहयोग से कर रहे हैं।
होली पर बढ़ेगी संख्या
आयोजकों के अनुसार प्रतिदिन करीब 100 श्रद्धालु अनुष्ठान में शामिल हो रहे हैं। वहीं होली के अवसर पर लगभग 500 श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। मंदिर परिसर में भक्ति, अनुशासन और उत्साह का विशेष वातावरण बना हुआ है।



