नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़:- दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध मार्च के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का बैरिकेड फांदना पूरे उत्तर भारत की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। इसे लेकर न केवल सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है, बल्कि सपा कार्यकर्ताओं में भी नए जोश का संचार हुआ है। पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने इस कदम को “लोकतंत्र की रक्षा के लिए उठाई गई छलांग” बताया है।
पुराने दौर की याद: जब सड़कों पर होती थी सपा की पहचान
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश की यह सक्रियता मुलायम सिंह यादव के दौर की समाजवादी राजनीति की याद दिलाती है। जब बसपा शासन में सपा कार्यकर्ता लाठीचार्ज और गिरफ्तारी के बावजूद सड़कों पर डटे रहते थे। कई बार विधानसभा के सामने सपा कार्यकर्ताओं की घेराबंदी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन जाती थी।
“चुनाव आयोग कछुए की रफ्तार से ना चले”: अखिलेश
प्रदर्शन के दौरान अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा:”अगर वोट का अधिकार ही छिन जाएगा, तो लोकतंत्र कहां बचेगा? हम अपील करते हैं कि चुनाव आयोग फास्ट ट्रैक कार्रवाई करे। जिन जिलों में उपचुनाव में बेइमानी हुई, उन डीएम को तत्काल सस्पेंड किया जाए। हमने 18,000 डिलीटेड वोट का शपथ पत्र सौंपा है।”
“हमने 18 हज़ार डिलीटेड वाले वोट दिए हैं, बाय इलेक्शन में जो लूट हुई है उसकी जानकारी दी है, उन तमाम जिला अधिकारियों को सस्पेंड कर दे सरकार।”
– माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी pic.twitter.com/UaKjLBzc9G
— Samajwadi Party (@samajwadiparty) August 11, 2025
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
दिल्ली में जब विपक्षी सांसदों को पुलिस ने रोका, उस समय अखिलेश यादव ने बैरिकेड पर चढ़कर छलांग लगाई और धरने पर बैठ गए। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसे सपा कार्यकर्ता “संघर्ष की वापसी” के रूप में प्रचारित कर रहे हैं।
शिवपाल यादव का समर्थन
सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा:”संघर्ष की पहचान – रुकना नहीं, टकराना है! जब हक़ की आवाज़ रोकने को बैरिकेड खड़े हों, तो समाजवादी पीछे नहीं हटते। आज अखिलेश यादव जी की छलांग लोकतंत्र बचाने की कसम पर थी।”
संघर्ष की पहचान — रुकना नहीं, टकराना है!
जब हक़ की आवाज़ रोकने को बैरिकेड खड़े हों,
तो समाजवादी पीछे नहीं हटते — बैरिकेड तोड़ते हैं, कूदते हैं, ललकारते हैं!आज अखिलेश यादव जी की छलांग सिर्फ़ लोहे पर नहीं थी,
ये छलांग थी लोकतंत्र बचाने की कसम पर! pic.twitter.com/BXwt7c5i8f— Shivpal Singh Yadav (@shivpalsinghyad) August 11, 2025



