न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज के संगम तट पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और पुलिस के बीच हुए विवाद ने सियासी तूल पकड़ लिया है। इस मामले पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है।
मौनी अमावस्या स्नान के दौरान संगम क्षेत्र में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनुयायियों के साथ पालकी के जरिए स्नान के लिए जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस से कहासुनी हो गई। शंकराचार्य ने प्रशासन पर शिष्यों के साथ बदसलूकी, धक्का-मुक्की और मारपीट के आरोप लगाए। विरोध स्वरूप उन्होंने बिना स्नान किए ही अपनी पालकी वापस अखाड़े की ओर मोड़ ली।
अखिलेश यादव ने एक्स पर जताई नाराजगी
इस घटनाक्रम पर अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि माघ मेला क्षेत्र में साधु-संतों और श्रद्धालुओं के साथ इस तरह का व्यवहार निंदनीय और अक्षम्य है। उन्होंने कहा कि शाही स्नान जैसी सदियों पुरानी सनातन परंपरा में भाजपा सरकार लगातार बाधा डाल रही है।
अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि मौनी अमावस्या का शाही स्नान कोई नया आयोजन नहीं है, फिर ऐसी घटनाएं केवल भाजपा शासन में ही क्यों सामने आ रही हैं। उन्होंने इसे सरकार की विफल व्यवस्था और कुशासन का परिणाम बताया और मामले की जांच की मांग की।
मौनी अमावस्या पर उमड़ा आस्था का सैलाब
माघ मेला के सबसे बड़े स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर संगम तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। रविवार दोपहर 12 बजे तक करीब 3 करोड़ 15 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया। देर रात से ही श्रद्धालुओं का संगम क्षेत्र में पहुंचना शुरू हो गया था। घने कोहरे के बावजूद सभी घाटों पर भारी भीड़ देखने को मिली।
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भोर तीन बजे से संगम नोज पर श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी। सुबह आठ बजे तक एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु स्नान कर चुके थे। दोपहर होते-होते प्रयागराज के रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर लौटने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। संगम के साथ-साथ शहर के अन्य गंगा घाटों पर भी भारी भीड़ नजर आई।
विवाद पर प्रशासन ने रखा पक्ष
शंकराचार्य की पालकी रोके जाने को लेकर प्रशासन ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। प्रशासन के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन करोड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी और सुरक्षा कारणों से किसी भी व्यक्ति को वाहन, पालकी या रथ से संगम तक जाने की अनुमति नहीं दी गई थी।
प्रशासन का कहना है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से पैदल स्नान के लिए जाने और उनके अनुयायियों को बारी-बारी से भेजने का अनुरोध किया गया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। इससे करीब तीन घंटे तक मार्ग अवरुद्ध रहा और आम श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान बैरियर तोड़े जाने और पुलिस कर्मियों से धक्का-मुक्की की बात भी सामने आई है।
पुलिस कमिश्नर जोगिन्दर कुमार ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है और जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



