न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- मिडिल ईस्ट में फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुए संघर्ष का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिख रहा है। खासतौर पर India में एलपीजी (LPG) सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ा है। हालिया संघर्ष और शांति वार्ताओं के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं।
3–4 साल लग सकते हैं हालात सामान्य होने में
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत की एलपीजी सप्लाई चेन को पूरी तरह पटरी पर लौटने में कम से कम 36 से 48 महीने यानी 3 से 4 साल का समय लग सकता है। इसका मुख्य कारण उत्पादन केंद्रों का बंद होना और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई में आई बाधाएं हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना चिंता का कारण
भारत के कुल एलपीजी आयात का लगभग 90% हिस्सा Strait of Hormuz से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में अभी भी अस्थिरता बनी हुई है, जिससे आपूर्ति बाधित हो रही है। खाड़ी देशों—यूएई, कतर और सऊदी अरब—से आने वाली सप्लाई घटकर करीब 55% रह गई है।
कीमतों में तेजी
सप्लाई में कमी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ा है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में बढ़ोतरी हुई है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में भी बड़ा उछाल देखा गया है। इसका असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों पर खास तौर पर पड़ रहा है।
PNG की ओर बढ़ रहा फोकस
सरकार एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा दे रही है। जहां पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध है, वहां घरों को PNG पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज की जा रही है। इसके लिए हजारों करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है।
क्या है आगे की स्थिति?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में पूरी तरह स्थिरता नहीं आती, तब तक एलपीजी सप्लाई और कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।



