न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अब दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा समेत 31 प्रकार के मामलों में पुलिस सीधे FIR दर्ज नहीं करेगी। इस संबंध में राज्य के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने सभी जिलों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
क्या है नया निर्देश
नए आदेश के मुताबिक, इन मामलों में थाने पहले शिकायत दर्ज करेंगे, लेकिन FIR तभी लिखी जाएगी जब संबंधित अदालत से आदेश प्राप्त होगा। यानी अब इन मामलों में सीधे पुलिस कार्रवाई की जगह न्यायालय की भूमिका पहले होगी।
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद फैसला
यह कदम इलाहाबाद हाई कोर्ट लखनऊ बेंच की सख्त टिप्पणी के बाद उठाया गया है। अदालत ने 25 फरवरी को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि कुछ धाराओं में सीधे FIR दर्ज करना कानूनी प्रावधानों के खिलाफ है।
कोर्ट ने अनिरुद्ध तिवारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले में यह स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कुछ धाराओं में तभी संज्ञान लिया जा सकता है, जब पीड़ित पक्ष अदालत में शिकायत दर्ज करे।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
DGP ने माना कि कई बार पुलिस नियमों के विपरीत FIR दर्ज कर देती है, जिससे आरोपियों को अदालत में फायदा मिल जाता है और जांच प्रभावित होती है। इसे गंभीर त्रुटि बताते हुए उन्होंने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
किन मामलों में लागू होगा नियम
इस नए निर्देश के दायरे में कई तरह के मामले शामिल हैं, जैसे:
- दहेज प्रताड़ना
- घरेलू हिंसा
- मानहानि
- चेक बाउंस (Negotiable Instruments Act)
- कंज्यूमर प्रोटेक्शन से जुड़े मामले
- पशुओं के प्रति क्रूरता
- खनन (Mines and Minerals Act) से जुड़े मामले
इन सभी मामलों में कानून के तहत पहले अदालत में परिवाद दाखिल करना जरूरी है।
अधिकारियों को सख्त निर्देश
DGP ने थाना प्रभारियों और विवेचकों से कहा है कि वे संबंधित कानूनों का गंभीरता से अध्ययन करें और उसी के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें। बिना कानूनी प्रावधान के FIR दर्ज करने से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
इस फैसले से पुलिस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आएगा और कई मामलों में पहले न्यायालय की अनुमति लेना अनिवार्य हो जाएगा।



