नहीं रहे Harish Rana, लेकिन किसी के दिल में धड़केंगे और आंखों से दिखेगी दुनिया

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति Harish Rana का मंगलवार को All India Institute of Medical Sciences में निधन हो गया। वे पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे।

13 साल की लंबी लड़ाई के बाद निधन

सूत्रों के अनुसार, साल 2013 में एक हादसे के बाद हरीश राणा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वह चौथी मंजिल से गिर गए थे, जिससे उनके सिर में गहरी चोट आई और तब से वे कोमा में चले गए थे।

उन्हें जीवित रखने के लिए लंबे समय तक मेडिकल सपोर्ट—नली के जरिए भोजन और जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन—दी जा रही थी।

सुप्रीम कोर्ट से मिली थी इच्छामृत्यु की अनुमति

Supreme Court of India ने 11 मार्च को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दी थी।

यह मामला देश में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया था।

मौत के बाद भी देंगे जीवन

हरीश राणा भले ही इस दुनिया से चले गए हों, लेकिन उनका एक फैसला कई लोगों की जिंदगी रोशन करेगा। उनके माता-पिता ने कहा हार्ट वाल्व दान करने का निर्णय लिया साथ ही कॉर्निया (आंखें) दान करने का फैसला किया|

इसका मतलब है कि उनकी आंखें अब किसी और को दुनिया दिखाएंगी, और उनका दिल किसी और के जीवन को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

इंजीनियर बनने का सपना अधूरा

हरीश राणा Panjab University से बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। हादसे ने उनका करियर और जिंदगी दोनों बदल दी।उनकी कहानी संघर्ष, उम्मीद और मानवीय संवेदनाओं का एक गहरा उदाहरण बन गई है।

समाज के लिए एक संदेश

हरीश राणा का जीवन और उनके परिवार का निर्णय यह दिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी मानवता और दूसरों की मदद करने की भावना सबसे बड़ी होती है।

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