Saturday, March 14, 2026

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महिलाओं का करियर खत्म हो जाएगा, कोई नौकरी भी नहीं देगा; सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

न्यूज़ डेस्क/ सर्वोदय न्यूज़:- देशभर में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए मासिक धर्म अवकाश (Menstrual Leave) लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका पर Supreme Court of India ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए स्पष्ट रुख अपनाया। अदालत ने ऐसी नीति को कानूनन लागू करने की मांग पर विचार करने से इनकार कर दिया।

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यदि इस तरह का प्रावधान अनिवार्य कर दिया गया, तो इसका उल्टा असर पड़ सकता है और कंपनियां महिलाओं को नौकरी देने से कतराने लगेंगी।

‘महिलाओं के करियर पर पड़ सकता है असर’

यह मामला Surya Kant और Joymalya Bagchi की पीठ के सामने आया था। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं कई बार महिलाओं को कमतर आंकने का संदेश भी देती हैं।

पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मासिक धर्म कोई नकारात्मक चीज नहीं है, बल्कि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। लेकिन यदि इसके लिए कानूनन वैतनिक अवकाश अनिवार्य कर दिया गया, तो नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से बच सकते हैं।

अनिवार्य नियम से हो सकता है उल्टा असर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वैच्छिक रूप से कंपनियों द्वारा ऐसी छुट्टी देना अच्छी बात है, लेकिन इसे कानून बनाकर लागू करने से महिलाओं के करियर पर असर पड़ सकता है।

अदालत ने कहा कि यदि यह कानूनी रूप से अनिवार्य हो गया तो कई संस्थान महिलाओं को भर्ती करने से बच सकते हैं, जिससे उनके पेशेवर अवसर कम हो सकते हैं।

याचिकाकर्ता की दलील

यह जनहित याचिका Shailendra Mani Tripathi की ओर से दाखिल की गई थी। उनके वकील M R Shamshad ने अदालत को बताया कि कुछ राज्यों और संस्थानों ने पहले ही इस दिशा में कदम उठाए हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि Kerala में कुछ शैक्षणिक संस्थानों ने छात्राओं को इस दौरान विशेष रियायत देने की व्यवस्था की है। साथ ही कई निजी कंपनियां भी अपनी महिला कर्मचारियों को स्वेच्छा से ऐसी छुट्टी दे रही हैं।

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अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि सरकार और संबंधित अधिकारी इस मुद्दे पर सभी हितधारकों से चर्चा कर नीति बनाने की संभावना पर विचार कर सकते हैं।

साथ ही अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता पहले ही अपना ज्ञापन संबंधित अधिकारियों को दे चुके हैं, इसलिए उन्हें बार-बार अदालत आने की आवश्यकता नहीं है। अधिकारियों को इस पर उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।

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