न्यूज़ डेस्क/ सर्वोदय न्यूज़:– बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। उनका राज्यसभा कार्यकाल 10 अप्रैल से शुरू होगा। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।
बिहार में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और अब तक नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही एनडीए सरकार चल रही थी। लेकिन उनके हटने की स्थिति में भाजपा के सामने नए नेता को चुनने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। इस प्रक्रिया में पार्टी को कई अहम सवालों के जवाब भी तलाशने होंगे।
1. नीतीश कुमार जैसा कद वाला नेता ढूंढना मुश्किल
भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि नए मुख्यमंत्री की तुलना सीधे नीतीश कुमार से की जाएगी। जेपी आंदोलन से निकले नीतीश कुमार को करीब पांच दशक का राजनीतिक अनुभव है। उनकी छवि बिहार की राजनीति में अजातशत्रु नेता की रही है। यही वजह है कि विरोधी भी अक्सर उनके प्रति सम्मानजनक रवैया रखते रहे हैं।
2. सामाजिक समीकरणों को संभालना
बिहार की राजनीति सामाजिक समीकरणों पर काफी हद तक टिकी हुई है। नीतीश कुमार ने अति पिछड़ा वर्ग को मजबूत राजनीतिक पहचान दी और यादव राजनीति के मुकाबले एक नया वोट बैंक तैयार किया। ऐसे में भाजपा को नया चेहरा चुनते समय इस सामाजिक संतुलन का खास ध्यान रखना होगा।
3. सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता
नीतीश कुमार की एक बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने सरकार चलाते समय सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की कोशिश की। “सबका साथ, सबका विकास” की नीति को उन्होंने व्यवहार में लागू करने की कोशिश की। नया मुख्यमंत्री भी इसी कसौटी पर परखा जाएगा।
4. महिला सुरक्षा और शराबबंदी जैसे मुद्दे
2005 में सत्ता में आने के बाद नीतीश कुमार ने कई बड़े फैसले लिए। महिला सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए गए और शराबबंदी लागू की गई। इन फैसलों ने बिहार की राजनीति और समाज दोनों पर असर डाला। इसलिए नए मुख्यमंत्री को इन मुद्दों पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
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5. करिश्माई नेतृत्व की जरूरत
किसी भी सरकार को मजबूत बनाने के लिए करिश्माई नेतृत्व जरूरी माना जाता है। नीतीश कुमार लंबे समय तक इसी करिश्मे के सहारे सत्ता में बने रहे। अब भाजपा के सामने चुनौती यह है कि क्या वह बिहार को ऐसा ही प्रभावशाली और लोकप्रिय नेता दे पाएगी।
फिलहाल बिहार की राजनीति में कई नामों की चर्चा जरूर है, लेकिन अभी तक किसी एक चेहरे पर सहमति नहीं बनी है। आने वाले दिनों में भाजपा और जेडीयू के बीच बैठकों के बाद ही यह तय होगा कि नीतीश कुमार के बाद बिहार की कमान किसे सौंपी जाएगी।



