Saturday, February 21, 2026

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यूपी में तेज हुई ब्राह्मण सियासत,ब्रजेश पाठक के बटुक पूजन के बाद अब राजभर का दांव; विपक्ष भी…

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘प्रबुद्ध वर्ग’ यानी ब्राह्मण मतदाता एक बार फिर केंद्र में आ गए हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सूबे की सियासत में ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की खुली कवायद शुरू हो चुकी है। हालिया ‘शिखा विवाद’ के बाद यह राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है, जो अब धार्मिक आयोजनों, रैलियों और सार्वजनिक संदेशों के जरिए दिखाई दे रही है।

ब्रजेश पाठक का बटुक पूजन

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने प्रयागराज माघ मेले में ब्राह्मण बटुकों की चोटी खींचे जाने की घटना को ‘महापाप’ बताते हुए कड़ा रुख अपनाया। इसके बाद उन्होंने अपने सरकारी आवास पर बटुकों को आमंत्रित कर विधि-विधान से पूजन किया, उनके पैर पखारे और आशीर्वाद लिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ब्राह्मण समाज में उपजे असंतोष को शांत करने के लिए ‘डैमेज कंट्रोल’ की रणनीति का हिस्सा है।

ओपी राजभर का ‘प्रबुद्ध’ दांव

ब्रजेश पाठक की पहल के बाद सुभासपा प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। आजमगढ़ में प्रस्तावित ‘सामाजिक समरसता रैली’ में उन्होंने बड़ी संख्या में प्रबुद्ध ब्राह्मणों को आमंत्रित किया है। इसे राजभर के सामाजिक आधार को विस्तारित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे वे पिछड़ों के साथ-साथ सवर्ण मतदाताओं में भी पैठ बना सकें।

मायावती का 2007 वाला फॉर्मूला

बसपा प्रमुख मायावती ने भी ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की खुली अपील की है। उन्होंने 2007 के ‘दलित-ब्राह्मण सोशल इंजीनियरिंग’ मॉडल की याद दिलाते हुए भरोसा दिलाया कि उनके शासन में ब्राह्मणों का सम्मान सुरक्षित रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा के जरिए एक बार फिर वही समीकरण मजबूत करने की कोशिश दिख रही है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव का हमला

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव लगातार योगी सरकार पर ब्राह्मणों की उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं। वे पूर्वांचल की घटनाओं और कुछ चर्चित मामलों का हवाला देकर यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि भाजपा शासन में ब्राह्मण समाज असुरक्षित महसूस कर रहा है।

अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा

इस बीच बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने ब्राह्मण सम्मान के मुद्दे पर पद छोड़ने और नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की है।

कुल मिलाकर, प्रदेश की लगभग 12-13 प्रतिशत आबादी वाला ब्राह्मण समाज एक बार फिर सत्ता की राजनीति का केंद्र बन गया है। अब देखना यह है कि 2027 की राह में कौन-सा दल इस सामाजिक समीकरण को अपने पक्ष में मोड़ पाता है।

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