न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- कानपुर की स्माल आर्म्स फैक्ट्री (SAF) में तैयार की जा रही अत्याधुनिक असॉल्ट राइफल AK-203 अब पूरी तरह स्वदेशी बन चुकी है। एक मिनट में करीब 600 गोलियां दागने में सक्षम यह राइफल अब भारत में ही बने पुर्जों और तकनीक से तैयार हो रही है। रूस के सहयोग से शुरू हुई इस परियोजना में अब विदेशी हिस्सेदारी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
सेना को सौंपे जाने से पहले इस स्वदेशी राइफल का तीन चरणों में ट्रायल किया जाएगा। पहला विंटर ट्रायल इसी महीने हिमाचल प्रदेश के सुमडो क्षेत्र में प्रस्तावित है। यह परीक्षण भारतीय सेना, स्माल आर्म्स फैक्ट्री कानपुर और अमेठी स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री प्रोजेक्ट कोरवा की संयुक्त टीम की निगरानी में होगा। इसके बाद गर्मी में राजस्थान और बारिश के मौसम में दक्षिण भारत में इसके ट्रायल किए जाएंगे।
चरणबद्ध तरीके से हुआ स्वदेशीकरण
भारत-रूस की संयुक्त कंपनी IRRPL ने AK-203 के निर्माण की शुरुआत की थी। जुलाई 2024 से कानपुर की SAF में इसका उत्पादन शुरू हुआ। शुरुआती चरण में राइफल के लगभग 85 प्रतिशत पार्ट्स रूस से और 15 प्रतिशत भारत में बनते थे। इसके बाद यह अनुपात बदला और अंततः अब AK-203 को 100 प्रतिशत स्वदेशी पुर्जों से तैयार किया जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय के अधीन एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड की कानपुर स्थित फैक्ट्री में इस राइफल के अधिकतर पार्ट्स बनाए जाते हैं। कुछ हिस्सों का निर्माण कोलकाता की ईशापुर राइफल फैक्ट्री में होता है, जबकि असेंबलिंग का काम अमेठी में किया जाता है। फायरिंग ट्रायल सफल रहने के बाद इसे भारतीय सेना को सौंप दिया जाएगा।
सेना का नया मुख्य हथियार बनेगी AK-203
भारतीय सेना अपने जवानों को चरणबद्ध तरीके से AK-203 असॉल्ट राइफल से लैस कर रही है। पहले चरण में पांच लाख से अधिक राइफलें सेना को देने की योजना है, जिनमें से कुछ की आपूर्ति पहले ही की जा चुकी है। आने वाले समय में सेना को मिलने वाली सभी राइफलें पूरी तरह स्वदेशी होंगी। फिलहाल सेना में INSAS राइफल का इस्तेमाल हो रहा है, जिसे अगले कुछ वर्षों में AK-203 से बदला जाएगा।
आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि
इस परियोजना से जुड़े महाप्रबंधक सुरेंद्रपति के अनुसार, AK-203 का पूर्ण स्वदेशीकरण आत्मनिर्भर भारत अभियान की बड़ी सफलता है। तीनों मौसम में सफल परीक्षण के बाद यह राइफल औपचारिक रूप से सेना को सौंप दी जाएगी।
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इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जो AK-203 असॉल्ट राइफल का स्वदेशी निर्माण कर रहे हैं।
AK-47 से ज्यादा आधुनिक है AK-203
AK-203 को पुराने AK-47 की तुलना में अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाया गया है। इसकी मारक क्षमता और रेंज AK-47 से अधिक है। जहां AK-47 की मैगजीन क्षमता 20 से 30 राउंड तक होती है, वहीं AK-203 में 30 राउंड की स्टैंडर्ड मैगजीन दी गई है।
AK-203 असॉल्ट राइफल की खास खूबियां
- फोल्डिंग और एडजस्टेबल बटस्टॉक
- नाटो स्टैंडर्ड 7.62 मिमी कारतूस का उपयोग
- एक मिनट में करीब 600 राउंड फायर करने की क्षमता
- 400 मीटर तक सटीक और प्रभावी फायरिंग
- पिकेटिनी रेल और नाइट विजन सिस्टम की सुविधा
- वजन करीब 3.8 किलोग्राम
- स्टॉक मोड़ने पर लंबाई 690 मिमी
- भारतीय सेना को 5 लाख से ज्यादा राइफलें देने की योजना



