Thursday, March 26, 2026

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चार धाम यात्रा पर स्थिति स्पष्ट, हिंदुओं के साथ सिख, बौद्ध और जैन श्रद्धालुओं को ही मिलेगा प्रवेश

Char Dham Yatra Update: उत्तराखंड के चार धामों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं पर अब स्थिति साफ हो गई है। गंगोत्री मंदिर समिति और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने स्पष्ट किया है कि चारधाम में केवल हिंदू धर्म के अनुयायी और सनातन परंपरा से जुड़े सिख, जैन व बौद्ध श्रद्धालुओं को ही दर्शन की अनुमति होगी।

बीकेटीसी ने बताया निर्णय का आधार

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि केदारनाथ और बदरीनाथ धाम किसी पर्यटन स्थल की तरह नहीं हैं, बल्कि ये सनातन संस्कृति के सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के अनुसार सिख, जैन और बौद्ध धर्म सनातन परंपरा का हिस्सा माने जाते हैं, जबकि अनुच्छेद 26 धार्मिक संस्थाओं को अपनी परंपराओं और पूजा-पद्धतियों की रक्षा का अधिकार देता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि सदियों से चली आ रही धार्मिक मर्यादा, अनुशासन और पवित्रता को बनाए रखने के लिए लिया गया है। उत्तराखंड में पर्यटन के लिए कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन धामों की धार्मिक पहचान से समझौता नहीं किया जा सकता।

गंगोत्री मंदिर समिति का समर्थन

गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि हिंदू श्रद्धालुओं के साथ सिख समाज के लोग भी दर्शन कर सकते हैं। जो लोग हिंदू धर्म और उसकी मान्यताओं में आस्था रखते हैं और उसका सम्मान करते हैं, उन्हें दर्शन की अनुमति दी जाएगी।

धार्मिक संगठनों ने फैसले का किया स्वागत

चारधाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के प्रस्ताव का कई धार्मिक संगठनों ने समर्थन किया है। श्री केदार सभा, श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत समेत अन्य सनातन संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। श्री गंगोत्री और श्री यमुनोत्री मंदिर समितियों ने भी इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर दिया है।

पुरानी परंपरा का औपचारिक ऐलान

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मंदिरों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश पहले से ही प्रतिबंधित रहा है। यह कोई नया नियम नहीं, बल्कि प्राचीन परंपरा का औपचारिक पालन है। उन्होंने कहा कि यह सवाल किसी के धर्म का नहीं, बल्कि आस्था का है।

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बतादेंकि जैसे मस्जिद और चर्च में धार्मिक अनुशासन होता है, वैसे ही मंदिरों की भी अपनी मर्यादा है। अदालतें भी स्पष्ट कर चुकी हैं कि मंदिर में प्रवेश सामान्य नागरिक अधिकार नहीं, बल्कि धार्मिक आचरण से जुड़ा विषय है।

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने भी ठहराया सही

देहरादून में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इस फैसले को उचित बताया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की देवी-देवताओं में आस्था नहीं है, उनका चारधाम आने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन संस्कृति को संरक्षित करने के लिए सख्त कदम उठाना समय की जरूरत है।

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