Saturday, February 14, 2026

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“मैं जीना चाहता हूं, लेकिन क्या करूं…”— बीएलओ के कथित सुसाइड नोट ने सभी को झकझोर दिया

न्यूज डेस्क/सर्वोदय न्यूज:- जिले में एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां बीएलओ और सहायक अध्यापक सर्वेश सिंह का शव रविवार सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका हुआ मिला। मौके पर पहुंची पुलिस को कमरे की तलाशी के दौरान एक डायरी और एक पेज पर लिखे कई नोट मिले, जिनमें उन्होंने अपने मन की पीड़ा और मानसिक दबाव का ज़िक्र किया है।

कथित सुसाइड नोट की शुरुआती पंक्तियां ही पढ़ने वालों को भीतर तक झकझोर देती हैं—“मैं जीना तो चाहता हूं, पर क्या करूं… बहुत बेचैनी और घुटन हो रही है। अपने आप को डरा हुआ महसूस कर रहा हूं। मेरी चार छोटी बेटियों का ख्याल रखना…”

दो पन्नों में लिखा दर्द

पुलिस के अनुसार, पहले एक पेज पर 12 पंक्तियों का नोट मिला, जिसमें उन्होंने खुद को असफल महसूस करने की बात लिखी। इसमें उन्होंने लिखा—
“मैं सर्वेश सिंह, बीएलओ भाग संख्या 406… मैं हार गया हूँ। अपना ध्यान रखना। इसका केवल मैं जिम्मेदार हूं, किसी का कोई दोष नहीं।”

उसी पेज पर उन्होंने 29 नवंबर की तारीख और अपने हस्ताक्षर किए थे। नीचे एक पंक्ति में उन्होंने लिखा—“बहुत टेंशन में हूं।”

डायरी में मिला विस्तृत पत्र

ड्रेसिंग में रखी डायरी के नीचे एक दो पन्नों का विस्तृत पत्र मिला, जिसे उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को संबोधित किया था। इसमें उन्होंने एसआईआर गणना का लक्ष्य पूरा न कर पाने का दबाव, लगातार तनाव और बीमारी झेल रही अपनी बेटियों की चिंता को अपनी व्यथा का मुख्य कारण बताया।

उन्होंने लिखा कि 15 वर्षों में पहली बार उन्हें 7 अक्टूबर को बूथ संख्या 406 पर बीएलओ नियुक्त किया गया था। विषय की पूरी जानकारी न होने के कारण वह लक्ष्य समय पर पूरा नहीं कर पा रहे थे।

उन्होंने लिखा—“रात-दिन मेहनत कर रहा था, लेकिन काम पूरा नहीं हो रहा था। मानसिक रूप से बहुत दबाव महसूस कर रहा था। परिवार का कोई दोष नहीं, उन्होंने हमेशा हौसला बढ़ाया। पूरी जिम्मेदारी मेरी है।”

परिवार और बच्चों के प्रति चिंता

नोट में उन्होंने अपनी चार बेटियों का जिक्र करते हुए लिखा कि उनकी अच्छी देखभाल की जाए और उनकी सेवा से मिलने वाली राशि पत्नी को दी जाए ताकि बेटियों का भविष्य सुरक्षित रहे।

एक पन्ने पर लिखा था—“लिखते समय बहुत पीड़ा हो रही है… अधिकारियों से गुजारिश है कि मेरे परिवार को ज्यादा परेशान न किया जाए।”

अंतिम पन्ना और भावुक संदेश

अंतिम पन्ने में उन्होंने लिखा—“अगर थोड़ा और समय होता तो शायद काम पूरा कर देता। मेरे न रहने के बाद किसी पर दोष मत लगाना। मेरे विद्यालय के बच्चों को बहुत-बहुत प्यार… मन लगाकर पढ़ना। आई एम सॉरी।”

शिक्षक द्वारा लिखे ये शब्द पढ़कर शिक्षकों, सहकर्मियों और पूरे गांव में गहरा शोक फैल गया है। शिक्षा विभाग भी इस घटना से स्तब्ध है।

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