Premanand Maharaj Pravachan 2025: आजकल कई लोग छोटी-छोटी बातों पर कसम खाने लगते हैं। कुछ इसे अपनी बातों में विश्वसनीयता दिखाने के लिए करते हैं, तो कुछ लोगों की आदत में यह शामिल होता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि कोई व्यक्ति बार-बार कसम खाता है और उसे तोड़ देता है तो उसका पुण्य क्या होता है? हाल ही में इस सवाल का जवाब प्रेमानंद महाराज ने बड़े स्पष्ट तरीके से दिया।
प्रेमानंद महाराज ने कहा क्या?
महाराज ने कहा कि जल्दी-जल्दी कसम लेना गलत है। जो लोग कसम लेते हैं और फिर उसे निभाने में असफल होते हैं, उनके पुण्य नष्ट हो जाते हैं। इससे हृदय दुखी होता है, व्यक्ति का सामाजिक और मानसिक स्तर गिरता है, और लोग उसका उपहास करते हैं।
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महाराज ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी गलत आदत का शिकार है तो उसे सीधे कसम खाने से बचना चाहिए। पहले प्रयास और अभ्यास करना चाहिए, जैसे दो-तीन महीने तक उस काम से बचना, और फिर संकल्प लेना।
कब लेना चाहिए कसम?
महाराज ने स्पष्ट किया कि कसम तभी लेनी चाहिए जब आप पहले खुद पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर लें। दो-चार महीने तक प्रयास करने के बाद ही कसम लेनी चाहिए। यदि पहले कसम लिया और टूट गया, तो व्यक्ति अपराधबोध का सामना करता है और पुण्य कम हो जाता है।
अन्य सवालों का हल
प्रेमानंद महाराज अपने प्रवचनों में अक्सर रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े सवालों के जवाब देते हैं। हाल ही में एक महिला ने पूछा कि भगवान से मांगी हुई चीज़ें क्यों नहीं मिलती। महाराज ने कहा कि भगवान से सही तरीके से और पूरे हक के साथ मांगना चाहिए। उन्हें अपना मित्र समझकर स्पष्ट रूप से अपनी इच्छा बतानी चाहिए।



