न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ब्रह्माकुमारी संगठन के “शांति शिखर – मेडिटेशन सेंटर” का उद्घाटन किया। यह केंद्र अब भारत और दुनिया भर के साधकों के लिए आध्यात्मिक साधना और वैश्विक शांति का प्रतीक बनेगा।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में आध्यात्मिक मूल्यों और सेवा भावना की बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहा -“मैं यहां अतिथि नहीं हूं, मैं आपका ही हूं।”
स्थापना दिवस और आध्यात्मिक उद्घाटन का संगम
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा —“आज का दिन बहुत विशेष है। आज छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड अपने स्थापना दिवस मना रहे हैं। मैं सभी राज्यों के निवासियों को हार्दिक बधाई देता हूं।”
उन्होंने कहा कि यह दिन सिर्फ राज्यों की वर्षगांठ नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाने का अवसर भी है।
विकसित भारत में ब्रह्माकुमारीज़ की भूमिका
PM मोदी ने कहा कि भारत के विकास में आध्यात्मिक संस्थाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।“राज्य के विकास से देश का विकास के मंत्र पर चलते हुए हम भारत को विकसित बनाने के अभियान में जुटे हैं। इस अहम यात्रा में ब्रह्माकुमारी जैसी संस्थाओं का बड़ा योगदान है। यहां शब्द कम, सेवा अधिक है।”
‘मैं अतिथि नहीं, आपका ही हूं’ – मोदी का भावनात्मक जुड़ाव
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका ब्रह्माकुमारी संगठन से जुड़ाव दशकों पुराना है।“मैं बीते कई दशकों से आप सबके साथ जुड़ा हुआ हूं। मैं यहां अतिथि नहीं हूं, मैं आपका ही हूं। मैंने इस आध्यात्मिक आंदोलन को वटवृक्ष की तरह बढ़ते हुए देखा है — चाहे अहमदाबाद का Future of Power कार्यक्रम हो या माउंट आबू के आयोजन।”
उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली आने के बाद भी स्वच्छ भारत मिशन, आजादी का अमृत महोत्सव और जल जन अभियान जैसे अभियानों में ब्रह्माकुमारी बहनों का योगदान सराहनीय रहा है।
‘आचारः परमो धर्मः’ – ब्रह्माकुमारी की शक्ति का मूल
प्रधानमंत्री ने संस्कृत श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा —“आचारः परमो धर्मः, आचारः परमं तपः।” उन्होंने कहा कि जब शब्द आचरण में उतरता है, तभी परिवर्तन संभव होता है। यही ब्रह्माकुमारी संस्था की आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत है।
“आपका पहला अभिवादन ही ‘ओम शांति’ होता है, जो अपने आप में साधना का संदेश है।”
विश्व कल्याण और भारत की भूमिका
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हमेशा से ‘विश्व कल्याण’ के सिद्धांत पर चलता आया है।“हम वो हैं, जो जीव में शिव देखते हैं। हमारा हर धार्मिक अनुष्ठान ‘विश्व का कल्याण हो’ के उद्घोष के साथ समाप्त होता है। आज भारत इसी भावना के साथ वैश्विक संकटों में सबसे पहले मदद के लिए आगे आता है।”
‘शांति शिखर’ से वैश्विक शांति का संदेश
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केंद्र आत्मसंयम और आत्मज्ञान का मंदिर बनेगा —“आत्मसंयम से आत्मज्ञान, आत्मज्ञान से आत्म-साक्षात्कार और आत्म-साक्षात्कार से आत्मशांति – इसी मार्ग पर चलते हुए ‘शांति शिखर’ विश्व शांति का केंद्र बनेगा।”



