न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सरकारी ज़मीन और तालाब पर बनी मस्जिद के ध्वस्तीकरण मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकल पीठ ने यह फैसला दशहरा अवकाश के दौरान विशेष रूप से बैठी बेंच में सुनाया।
कोर्ट ने कहा – वैकल्पिक उपाय मौजूद, ट्रायल कोर्ट में जाएं
मसाजिद शरीफ गोसुलबारा रावां बुजुर्ग और उसके मुतवल्ली मिंजर की ओर से दाखिल याचिका में ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं अरविंद कुमार त्रिपाठी और शशांक श्री त्रिपाठी ने मामले की अर्जेंट सुनवाई की मांग की, जबकि राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल ने पक्ष रखा।
कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए हस्तक्षेप से इनकार किया और कहा कि याचिकाकर्ता के पास वैकल्पिक उपाय मौजूद हैं, वे ट्रायल कोर्ट में अपील दाखिल कर सकते हैं।
क्या है मामला?
याचिका में आरोप था कि मस्जिद, बारात घर और एक अस्पताल को गैरकानूनी ढंग से ध्वस्त किया जा रहा है। कहा गया कि बारात घर को पहले ही गिराया जा चुका है और मस्जिद के कुछ हिस्से पर अब कार्रवाई हो रही है।
याचिका में यह भी कहा गया कि 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) और दशहरा जैसे अवकाश के दिन बुलडोजर कार्रवाई की गई, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती थी।
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याचिका में राज्य सरकार, डीएम-संभल, एसपी, एडीएम, तहसीलदार, और ग्राम सभा गोसुलबारा रावां बुजुर्ग को पक्षकार बनाया गया था।
स्थानीय लोग खुद गिरा रहे मस्जिद की दीवारें
संभल के रायां बुजुर्ग गांव में प्रशासन द्वारा चार दिन का समय दिए जाने के बाद स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने स्वयं ही मस्जिद के ढांचे को हटाना शुरू कर दिया। जुमे की नमाज के बाद ग्रामीणों ने दीवारें गिराने का काम शुरू कर दिया था।



