नवरात्र में बेटियों-महिलाओं के लिए सीएम योगी की पहल, निर्देश जारी

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- नवरात्र के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मिशन शक्ति के पांचवें चरण में प्रदेश के सभी थानों में पुलिस चौकी की तरह ’मिशन शक्ति केन्द्र’ खोले जाएंगे। जिसमे तैनात किए जाने वाले इंस्पेक्टर व सब इंस्पेक्टर महिला अपराधों की विवेचना करेंगे। इनके कामों का पर्यवेक्षण आईजी अथवा डीआईजी स्तर के अधिकारी करेंगे। डीजीपी राजीव कृष्णा ने इस बारे में सभी कप्तानों, पुलिस कमिश्नरों को इस दिशा में गम्भीरता से काम करने का निर्देश दिए है।

ऐसे होंगे मिशन शक्ति केन्द्र

हर मिशन शक्ति केन्द्र में एक इंस्पेक्टर/सब-इंस्पेक्टर प्रभारी होंगे। प्रभारी महिला अधिकारी को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही चार अन्य सब-इंस्पेक्टर तैनात होंगे, जिनमें कम से कम एक महिला होगी। 4 से 15 तक सिपाही/मुख्य आरक्षी रहेंगे, इनमें आधी संख्या महिला पुलिसकर्मियों की होगी। हर केन्द्र पर दो होमगार्ड भी तैनात किए जाएंगे। संवेदनशील मामलों में पीड़ित महिलाओं को मनोवैज्ञानिक परामर्श दिलाने की व्यवस्था होगी।

डीजीपी राजीव कृष्णा के निर्देश

मिशन शक्ति केन्द्रों में महिला शिकायतों की तुरंत सुनवाई होगी। पुलिसकर्मियों की तैनाती कम से कम 3 साल और अधिकतम 5 साल तक होगी। प्रशिक्षित कर्मियों को नोडल अधिकारी की सिफारिश पर अन्य थानों में भी भेजा जा सकेगा।थाना प्रभारी को मिशन शक्ति केन्द्र के लिए अलग कक्ष, कम्प्यूटर, स्टेशनरी और महिला शौचालय की व्यवस्था करनी होगी। महिला हेल्प डेस्क का ड्यूटी रोस्टर और कामकाज का फॉलो-अप अनिवार्य होगा।

मिशन शक्ति केन्द्रों की मुख्य जिम्मेदारियां

एंटी रोमियो स्क्वॉड और महिला बीट योजना का क्रियान्वयन व पर्यवेक्षण। महिलाओं से संबंधित सभी एफआईआर और आरोपी के खिलाफ की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड रखना। पीड़िताओं की काउंसलिंग, कानूनी मदद, पुनर्वास व मुआवजा दिलाने के लिए वन स्टॉप सेंटर और अन्य विभागों से समन्वय। पीड़िता की चिकित्सा जांच, दबिश और आवश्यक कार्यों के लिए महिला पुलिस की उपलब्धता। महिलाओं और लड़कियों के लिए साइबर सुरक्षा व जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना।

अफसरों की भूमिका

डीजीपी ने निर्देश दिया कि रेंज के आईजी, डीआईजी मिशन शक्ति केन्द्र की कार्ययोजना को धरातल पर लाने का काम करेंगे। साथ ही जिले के एसएसपी व नोडल अधिकारियों से लगातार संवाद करेंगे। ये अफसर ही मिशन शक्ति केन्द्र की संख्या के अनुसार आवश्यक महिला कर्मियों की संख्या उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे। यदि किसी जनपद में महिला कर्मियों की संख्या अधिक है तो अधिक संख्या वाले जनपदों से कम संख्या वाले जनपदों से आवश्यकता अनुसार महिला पुलिस कर्मियों की नियुक्ति की जाएगी।

थाने के किसी भी मामले में पीड़िता की मेडिकल जांच, दबिश व अन्य जरूरी कामों के लिए महिला पुलिस की उपलब्धता कराने का काम भी अफसरों को करना है। एसीपी अथवा सीओ अपने सर्किल के मिशन शक्ति केन्द्र के लिए सहायक नोडल अधिकारी होंगे। हर जोन के एडीजी अपने अधीन जिलों के मिशन शक्ति केन्द्रों के संचालन के लिए सर्वोच्च पर्यवेक्षक का काम करेंगे।

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