न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ वॉर जल्द खत्म होने के संकेत मिल रहे हैं। मंगलवार, 16 सितंबर को दोनों देशों के बीच हुई उच्चस्तरीय व्यापार वार्ता को दोनों पक्षों ने “सकारात्मक” करार दिया।
अमेरिका की ओर से असिस्टेंट यूएस ट्रेड रिप्रजेंटेटिव ब्रेंडन लिंच और भारत की ओर से वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के बीच यह बैठक हुई। अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने इसे “द्विपक्षीय व्यापार मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा” बताया।
भारत सरकार ने भी बयान जारी करते हुए कहा:“भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार के स्थायी महत्व को स्वीकार करते हुए बातचीत सकारात्मक रही।”
टैरिफ वॉर की पृष्ठभूमि: कब और क्यों बढ़ा तनाव?
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में खटास आ गई थी। खासतौर पर रूस से कच्चा तेल खरीदने के फैसले के बाद, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 25% बेस टैरिफ और 25% अतिरिक्त जुर्माना लगाया था।
टैरिफ विवाद के बाद यह पहली बार है कि कोई वरिष्ठ अमेरिकी व्यापार अधिकारी भारत दौरे पर आया है, जिससे दोनों देशों के बीच रिश्तों में सुधार की उम्मीदें जगी हैं।
ये नहीं था आधिकारिक वार्ता का छठा राउंड
वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह बैठक आधिकारिक छठे दौर की वार्ता नहीं थी, बल्कि उससे पहले की “पूर्व-सम्मेलन चर्चा” थी। उन्होंने बताया कि दोनों देश साप्ताहिक वर्चुअल बैठकों के माध्यम से भी संवाद बनाए हुए हैं।
रुपये में मजबूती: बाज़ार ने जताई उम्मीदें
भारत-अमेरिका वार्ता में सुधार के संकेत मिलते ही भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले आठ पैसे मजबूत होकर 88.08 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ।
विदेशी मुद्रा विश्लेषकों के अनुसार:
- घरेलू बाजार में सकारात्मकता
- डॉलर की कमजोरी
- फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक को लेकर अनिश्चितता
इन सभी कारकों ने रुपये को मजबूती प्रदान की।
अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या भारत और अमेरिका टैरिफ कटौती या पूर्ण समाप्ति की ओर बढ़ेंगे? यदि ऐसा होता है, तो न केवल व्यापारिक रिश्ते सुधरेंगे, बल्कि वैश्विक निवेशकों का विश्वास भी भारत में और मज़बूत होगा।



