न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- राजस्थान जैसे शुष्क राज्य में जहां खेती करना किसी चुनौती से कम नहीं, वहीं अब ‘Cottage Farming’ किसानों के लिए आत्मनिर्भरता का माध्यम बनती जा रही है। पारंपरिक खेती के मुकाबले यह मॉडल कम संसाधनों में ज्यादा लाभ और स्थायी जीवनशैली की ओर इशारा करता है।
क्या है Cottage Farming?
‘Cottage Farming’ का मतलब है छोटे स्तर पर खेती, पशुपालन, बागवानी, मधुमक्खी पालन जैसे कार्य, जो पारिवारिक या गांव स्तर पर संचालित किए जाते हैं।
इस मॉडल में घी, पनीर, अचार, ऊन, जैविक अनाज जैसे मूल्य वर्धित उत्पाद (Value-added Products) से अतिरिक्त आमदनी अर्जित की जाती है। यह खेती अब केवल खेतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बाजार, रोजगार और पर्यावरण की दिशा में भी अहम भूमिका निभा रही है।
विशेषज्ञों की राय में कितना अहम है Cottage Farming?
डॉ. हेमंत कुमार (Veterinary Surgeon):
डॉ हेमंत कुमार के मुताबिक Cottage Farming ग्रामीण क्षेत्र में कृषि और पशुपालन का सामंजस्यपूर्ण मिलन है, जिससे छोटे किसान स्थिर और दीर्घकालीन आय प्राप्त कर सकते हैं। विशेष रूप से राजस्थान जैसी शुष्क जलवायु वाले प्रदेश में यह मॉडल कृषि को टिकाऊ और लाभकारी बनाता है।”
डॉ. जयदीप भदौरिया (Senior Veterinary Officer):
डॉ जयदीप के मुताबिक “पशुपालन को खेती से जोड़कर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। दूध, घी, ऊन जैसे उत्पाद इसमें मुख्य भूमिका निभाते हैं।”
डॉ. वीरेंद्र कुमार (Veterinary Officer):
डॉ वीरेन्द्र कुमार का कहना है “कम पानी वाली फसलें और देसी पशु प्रजातियां राजस्थान में इस मॉडल को बेहद प्रभावशाली बनाती हैं।”
डॉ. मंगीलाल (Veterinary Officer):
वही डॉ मांगीलाल का कहना है कि “भेड़-बकरी और ऊंट पालन के ज़रिए किसान न सिर्फ स्थानीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।”
राजस्थान में Cottage Farming के उज्ज्वल अवसर
प्रमुख संभावनाएं:
- कम पानी वाली फसलें: बाजरा, ज्वार, मूँग, चना, अरहर
- जैविक खेती: एलोवेरा, अश्वगंधा, जैविक अनाज
- फल उत्पादन: बेर, करौंदा, अमरूद
- पशुपालन: देसी गाय, भैंस, ऊंट, भेड़-बकरी
- मधुमक्खी पालन व मछली पालन
- महिला सशक्तिकरण: हस्तशिल्प, प्रसंस्करण, घरेलू उद्योग
- एग्रो टूरिज्म: किसानों को अतिरिक्त आय
सरकार की योजनाएं और सहयोग
राज्य और केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं जैसे – NRLM (National Rural Livelihood Mission), NDDB (National Dairy Development Board), और PM-KISAN – cottage farming को ग्रामीण स्तर पर बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। Export Market में जैविक और देसी उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जो इस मॉडल को और मजबूत बनाता है।



