Thursday, March 26, 2026

Buy now

spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

कोयंबटूर से दिल्ली तक: सीपी राधाकृष्णन की उपराष्ट्रपति पद पर जीत से बीजेपी कैसे BJP लिख रही नई कहानी

नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़: एनडीए उम्मीदवार और महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति चुनाव में प्रभावशाली जीत दर्ज की है। उन्हें प्रथम वरीयता के 452 वोट मिले, जबकि विपक्षी प्रत्याशी जस्टिस बी सुधर्शन रेड्डी को 300 वोटों पर संतोष करना पड़ा। यह परिणाम अपेक्षित तो था, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ दूरगामी हो सकते हैं — खासकर तमिलनाडु और दक्षिण भारत में बीजेपी की रणनीति के लिहाज से।

आरएसएस से उपराष्ट्रपति भवन तक का सफर

सीपी राधाकृष्णन की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक समर्पित स्वयंसेवक के रूप में हुई थी। तमिलनाडु के तिरुप्पुर में जन्मे राधाकृष्णन ने व्यवसाय प्रशासन की पढ़ाई की और इसके बाद राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। 1998 और 1999 में वे कोयंबटूर से लोकसभा सांसद चुने गए, जब दक्षिण भारत में बीजेपी के लिए जमीन तैयार करना एक बड़ी चुनौती थी।

तमिलनाडु बीजेपी के संगठनात्मक स्तंभ

2004 में उन्हें तमिलनाडु बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। हालांकि, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें बाद में झारखंड और फिर महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। उनकी सौम्य और समावेशी राजनीति ने उन्हें ‘कोयंबटूर का वाजपेयी’ की उपाधि दिलाई।

दक्षिण में बीजेपी की मजबूत होती पकड़

बीजेपी तमिलनाडु जैसे राज्यों में अपनी राजनीतिक उपस्थिति को विस्तार देने के लिए लंबे समय से प्रयासरत है। राज्य में पार्टी का वोट शेयर धीरे-धीरे बढ़ रहा है, लेकिन इसे अभी तक पर्याप्त सीटों में तब्दील नहीं किया जा सका है। 2021 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को 2.6% वोट मिले, जबकि 2016 में यह आंकड़ा 2.9% था। ऐसे में पार्टी अब दहाई के आंकड़े तक पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही है।

ओबीसी कार्ड और गाउंडर समुदाय पर दांव

सीपी राधाकृष्णन की नियुक्ति एक और बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखी जा रही है। वे तमिलनाडु के प्रभावशाली गाउंडर (कोंगु वेल्लालर) समुदाय से आते हैं, जो राज्य की पश्चिमी बेल्ट में निर्णायक भूमिका निभाता है। यह इलाका बीजेपी के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल रहा है, और अब पार्टी इस क्षेत्र के ओबीसी वोटबैंक को साधने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

राजनीति में नया संदेश

राधाकृष्णन की यह नियुक्ति सिर्फ एक संवैधानिक पद की पूर्ति नहीं है, बल्कि इसके जरिए बीजेपी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह दक्षिण भारत को न केवल राजनीतिक रूप से, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। आने वाले समय में यह फैसला तमिलनाडु की राजनीति में बीजेपी के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

1,388FansLike
133FollowersFollow
621SubscribersSubscribe
- Advertisement -[cricket_score]

Latest Articles