न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की हालिया शिखर बैठक अब भले ही समाप्त हो चुकी हो, लेकिन इसके राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभावों की गूंज विश्व स्तर पर सुनाई दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा को जहां एक ओर अमेरिका के साथ बढ़ते टैरिफ तनाव के बीच देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन और रूस के साथ भारत की नजदीकी भी अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में है।
इस रिपोर्ट में जानते हैं कि भारत को इस SCO शिखर सम्मेलन से क्या लाभ हुआ, और क्यों ये यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक स्पष्ट संदेश बन गई।
1. द्विपक्षीय बैठकें: मोदी-शी और मोदी-पुतिन के बीच विशेष संवाद
प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से करीब 50-50 मिनट की द्विपक्षीय बैठकें कीं। पुतिन के विशेष अनुरोध पर दोनों नेता एक ही कार में यात्रा करते हुए भी लंबी बातचीत में लगे रहे — जो एक गहरा राजनयिक संदेश माना जा रहा है।
- भारत-चीन सीधी उड़ानें बहाल करने पर सहमति।
- पुतिन की दिसंबर में भारत यात्रा तय।
- दोनों बैठकों में टैरिफ संकट, यूक्रेन युद्ध, और द्विपक्षीय व्यापार पर बातचीत हुई।

2. कैमरे से परे की कहानी: तस्वीरों ने दिया बड़ा संदेश
जहां औपचारिक बयानबाजी में सतर्कता रही, वहीं अनौपचारिक बातचीत और बॉडी लैंग्वेज ने वैश्विक मंच पर बड़े संदेश दिए। मोदी और पुतिन के बीच गले मिलना, हाथ में हाथ डाले चलना, और शी जिनपिंग से गर्मजोशी से मिलना — इन सबने मिलकर यह दर्शाया कि भारत अब केवल पश्चिम की ओर नहीं देखता।
इन तस्वीरों ने चीन की सोशल मीडिया (वीबो) और सर्च इंजन (बायडू) पर टॉप ट्रेंड हासिल किया। यह घटनाएं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ-धमकी रणनीति के जवाब के रूप में देखी जा रही हैं।

3. मोदी-पुतिन की कार डिप्लोमेसी: ट्रंप को जवाब?
डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन की हाल ही में हुई कार यात्रा के महज दो हफ्तों बाद, पुतिन ने पीएम मोदी को भी अपनी कार में बैठाकर द्विपक्षीय बैठक स्थल तक लाने का फैसला किया। 10 मिनट की दूरी के बावजूद, दोनों नेता कार में ही 45 मिनट तक संवाद करते रहे।
यह घटना राजनीतिक संकेतों से भरी हुई है — यह दिखाता है कि भारत-रूस संबंध केवल औपचारिक नहीं, बल्कि निजी विश्वास पर आधारित हैं।

4. संयुक्त वक्तव्य में ‘पहलगाम हमला’: भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि SCO के संयुक्त बयान में ‘पहलगाम आतंकी हमले’ का स्पष्ट उल्लेख किया गया — जो इससे पहले कभी नहीं हुआ था। पिछली बैठक में इसका उल्लेख न होने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मसौदा दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।
पीएम मोदी ने इस बार मंच से सीधे सवाल किया:“क्या कुछ देशों द्वारा खुलेआम आतंकवाद को समर्थन देना स्वीकार्य है?”
उन्होंने आतंकवाद पर दोहरे मापदंड पर निशाना साधते हुए पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा किया, जबकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी वहीं मौजूद थे।
5. क्या मोदी बनेंगे ‘शांति दूत’? रूस-यूक्रेन युद्ध पर नया प्रयास
इस यात्रा से पहले पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की दोनों से दो बार बात की। SCO बैठक में पुतिन के साथ हुई बातचीत में भी यूक्रेन संघर्ष पर गहन चर्चा हुई।
मोदी ने स्पष्ट किया:”संघर्ष को जल्द समाप्त करना और स्थायी शांति स्थापित करना पूरी मानवता की मांग है।”
अब जब पुतिन दिसंबर में भारत आने वाले हैं, तो वैश्विक विश्लेषकों की निगाहें इस पर हैं कि क्या मोदी वास्तव में रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति वार्ताओं के सूत्रधार बन सकते हैं।



