सर्वोदय न्यूज़:- पशु चिकित्सा क्षेत्र वर्षों से पुरुष प्रधान माना जाता रहा है। लेकिन आज का समय इस परंपरा को बदल रहा है। देश भर में न केवल महिला वेटरनरी डॉक्टरों की संख्या बढ़ रही है, बल्कि वेटरनरी नर्सिंग में भी महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। चाहे वह सरकारी विभाग हो या प्राइवेट सेक्टर, महिलाओं का यह बढ़ता हुआ रुझान इस क्षेत्र को नई ऊर्जा, संवेदनशीलता और दक्षता प्रदान कर रहा है।
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महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का कारण
आधुनिक शिक्षा और जागरूकता के कारण अब अधिक महिलाएँ पशु चिकित्सा पढ़ाई कर रही हैं। गांवों और शहरों दोनों जगह परिवार भी महिलाओं को पढ़ाई और करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।डॉ. हेमंत तिवारी एवं प्रियंका तिवारी अनुसार, “महिलाओं में न केवल पढ़ाई के प्रति लगाव बढ़ा है, बल्कि उनमें सेवा भाव, धैर्य और समर्पण जैसे गुण भी होते हैं जो इस पेशे में बेहद जरूरी हैं।”
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सरकारी सेक्टर में महिलाओं की भूमिका
सरकारी पशु चिकित्सा विभागों में महिला डॉक्टर और नर्स दोनों को प्राथमिकता दी जा रही है। कई राज्यों में महिला अधिकारियों को पंचायत स्तर तक पशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए नियुक्त किया जा रहा है।
इससे पशुपालक महिलाओं को भी सुविधा मिलती है क्योंकि वे महिला डॉक्टरों से बेहतर संवाद स्थापित कर पाती हैं। ग्रामीण इलाकों में महिला वेटरनरी कर्मी जागरूकता अभियानों, टीकाकरण और स्वास्थ्य शिविरों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
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प्राइवेट सेक्टर में महिला डॉक्टर और नर्स
पेट क्लिनिक्स, हॉस्पिटल्स, फार्मा कंपनियाँ और पशु आहार उद्योग में महिलाओं की उपस्थिति बढ़ी है। पेट केयर उद्योग में महिलाओं का सौम्य व्यवहार और संवेदनशीलता पालतू पशुओं के मालिकों को आकर्षित करती है।
वेटरनरी नर्सिंग के क्षेत्र में महिलाएं देखभाल, इंजेक्शन देना, सर्जिकल असिस्टेंस और पशु स्वास्थ्य शिक्षा जैसे काम में दक्षता दिखा रही हैं। कई प्राइवेट क्लिनिक और हॉस्पिटल में महिलाओं को प्रबंधन और संचालन की जिम्मेदारी भी दी जा रही है।
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महिलाओं के लिए चुनौतियाँ और समाधान
हालांकि, महिलाओं को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जैसे कि लंबा कार्यकाल, गाँवों में असुविधाजनक यात्रा, सामाजिक बाधाएं और घरेलू जिम्मेदारियाँ।
लेकिन सरकार और कई NGOs इस दिशा में कदम उठा रहे हैं। अब महिलाओं के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम, सेफ्टी मेजर्स, और सुविधाजनक कार्य समय की व्यवस्था की जा रही है।
डॉ. तिवारी कहते हैं, “जब महिला डॉक्टर और नर्स खुश और सुरक्षित महसूस करते हैं, तो वे बेहतर सेवा दे पाती हैं, जिससे पशु चिकित्सा क्षेत्र का समग्र विकास होता है।”
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महिला डॉक्टर और नर्स की विशेषताएँ
महिलाओं में सहानुभूति, धैर्य, और सूक्ष्म अवलोकन क्षमता बेहतर होती है। यह पशुओं की देखभाल में सहायक सिद्ध होता है। साथ ही, वे पशुपालकों के साथ बेहतर संवाद स्थापित कर पशुओं के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बेहतर ढंग से समझा पाती हैं।



