Tuesday, August 11, 2026

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राहुल गांधी के ‘लंगड़ा घोड़ा’ बयान पर मचा सियासी घमासान: किस पर था निशाना?

मध्य प्रदेश/सर्वोदय न्यूज़:-  मध्य प्रदेश के दौरे पर पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी के नेताओं पर तीखा हमला बोला है। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन ‘लंगड़ा घोड़ा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर उन्होंने कांग्रेस के अंदर चल रही गुटबाजी और नेतृत्व संकट को उजागर कर दिया। सोशल मीडिया पर अब इस बयान को लेकर खूब चर्चा हो रही है—लोग यह जानना चाह रहे हैं कि आखिर राहुल गांधी का इशारा किसकी तरफ था?

राहुल गांधी ने पार्टी के कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हुए कहा: कांग्रेस में पहले बारात का घोड़ा रेस में और रेस का घोड़ा बारात में भेज दिया जाता था। अब ऐसा नहीं होगा। बारात का घोड़ा बारात में जाएगा और रेस का घोड़ा रेस में। लंगड़े घोड़े घर जाएंगे।

किस पर था राहुल गांधी का इशारा?

  • कमलनाथ: मध्य प्रदेश में कांग्रेस की करारी हार के बाद, कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ पर सवाल उठने लगे हैं। पार्टी को प्रदेश में एक भी सीट नहीं मिली, जिससे कमलनाथ की पकड़ पर सवाल उठने लगे हैं।
  • दिग्विजय सिंह: पार्टी के अंदरखाने में यह भी चर्चा है कि दिग्विजय सिंह की रणनीतियों का असर अब कमजोर पड़ चुका है।
  • अन्य वरिष्ठ नेता: राहुल गांधी का बयान उन नेताओं पर भी कटाक्ष माना जा रहा है जो पार्टी के लिए सक्रिय नहीं हैं लेकिन प्रभावशाली पदों पर काबिज हैं।

राहुल गांधी ने बैठक में साफ शब्दों में कहा कि अब पार्टी में अनुशासनहीनता और निष्क्रियता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि: कांग्रेस को अब स्लीपर सेल नहीं चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेता चाहिए। जिला अध्यक्षों और विधायकों को स्पष्ट कर दिया गया कि अगर संगठन को मजबूत बनाना है, तो 55 नए नेताओं को तैयार करना ही होगा।

राहुल गांधी के बयान के बाद ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर यूज़र्स ने तरह-तरह के कयास लगाने शुरू कर दिए। कुछ ने इसे कांग्रेस में युवा बनाम बुजुर्ग नेताओं के बीच संघर्ष बताया, तो कुछ ने इसे आने वाले पार्टी संगठन में बड़े फेरबदल का संकेत माना।

राहुल गांधी के ‘लंगड़ा घोड़ा’ वाले बयान ने मध्य प्रदेश की राजनीति और कांग्रेस के आंतरिक हालात को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। नाम भले ही न लिया गया हो, लेकिन संकेत साफ हैं कि अब पार्टी में सिर्फ पद और नाम से राजनीति नहीं चलेगी। कार्यक्षमता, अनुशासन और नतीजे ही तय करेंगे कि कौन रहेगा और कौन घर जाएगा।

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