सीएम योगी के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार से इस्तीफा, ED की जांच के बाद उठाया गया कदम

लखनऊ/सर्वोदय:-  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार से उनका इस्तीफा ले लिया गया है। यह कदम प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की जा रही जांच के बाद उठाया गया, जिसमें उनकी कंपनी MSB Creations और भगोड़े कारोबारी राशिद नसीम की रियल एस्टेट कंपनी शाइन सिटी के बीच हुए करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन पर सवाल उठाए गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार, MSB Creations, जो कि लखनऊ के सरकारी पते 30, राजभवन कॉलोनी पर रजिस्टर्ड है, को शाइन सिटी से बड़ी धनराशि प्राप्त हुई थी। इस लेन-देन को संदिग्ध मानते हुए ED ने इस पर औपचारिक जांच शुरू कर दी है।

शाइन सिटी पहले से ही एक बड़े रियल एस्टेट घोटाले के रूप में कुख्यात है, जिसमें हज़ारों निवेशकों से धोखाधड़ी कर अरबों रुपये हड़पने के आरोप हैं। इस घोटाले का मुख्य आरोपी राशिद नसीम अभी भी फरार है और उसके खिलाफ कई राज्यों में ग़ैर-जमानती वारंट जारी हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय का सख्त रुख

इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने मृत्युंजय कुमार से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा ले लिया है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी स्थिति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अभी तक कोई सफाई नहीं

मृत्युंजय कुमार की ओर से अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न तो उन्होंने कोई प्रेस बयान जारी किया है और न ही सोशल मीडिया पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। बताया जा रहा है कि वह इस समय सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

विपक्ष ने साधा निशाना

इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। विपक्षी दलों ने इसे लेकर सरकार पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजीव राय ने कहा:

“सरकार जिन लोगों के जरिए अपनी छवि चमका रही थी, वही लोग घोटालों में लिप्त पाए जा रहे हैं। यह सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।”

ED की जांच जारी

प्रवर्तन निदेशालय ने मामले में गहराई से जांच शुरू कर दी है। कंपनी के बैंक लेन-देन, टैक्स रिकॉर्ड, और शाइन सिटी से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच की जा रही है। यदि अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो फेमा (FEMA) और प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

Note- न्यूज़ सोर्स गूगल 

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