नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़: मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में SIR पर अंतरिम रोक लगाने, मतदाता सूची में हुए बदलावों की जांच कराने और चुनाव आयोग से संबंधित रिकॉर्ड अदालत में पेश कराने जैसी 10 प्रमुख राहतों की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी योग्य नागरिक का मतदान का अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका, विपक्षी नेताओं ने उठाए सवाल
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, याचिका को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर ‘राहुल गांधी बनाम इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया’ शीर्षक से सूचीबद्ध किया गया है। बताया गया है कि राहुल गांधी के अदालत पहुंचने से पहले ही कांग्रेस की कानूनी टीम ने याचिका दाखिल कर दी थी। निर्धारित समयसीमा के भीतर याचिका दायर करने के लिए वकील एस. प्रसन्ना ने इसे प्रस्तुत किया।
इस मुद्दे पर इंडिया ब्लॉक के कई नेताओं ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई। राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव सहित अन्य विपक्षी नेता मार्च में शामिल हुए।
राहुल गांधी की याचिका में क्या हैं 10 प्रमुख मांगें?
याचिका में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में संशोधन और चुनावी प्रक्रिया की निगरानी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर राहत मांगी गई है। इन मांगों का विवरण इस प्रकार है।
1. SIR से जुड़े सभी रिकॉर्ड अदालत में पेश किए जाएं
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि चुनाव आयोग को SIR से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया जाए। इसमें फाइलें, बैठकों का विवरण, आपत्तियों के रिकॉर्ड और 24 जून 2025 को प्रक्रिया शुरू करने से संबंधित फैसले के दस्तावेज शामिल हैं।
इसके अलावा ECINET और ERONET सिस्टम के एक्सेस लॉग भी उपलब्ध कराने की मांग की गई है, ताकि प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और रिकॉर्ड की जांच हो सके।
2. SIR के फैसलों की कानूनी वैधता परखने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह जांच करने का अनुरोध किया है कि SIR से जुड़े फैसले संवैधानिक प्रावधानों और लागू कानूनों के अनुरूप लिए गए हैं या नहीं।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 तथा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला दिया गया है। साथ ही, अधिकार क्षेत्र से बाहर लिए गए फैसलों को रद्द करने की मांग भी की गई है।
3. नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई
याचिका में मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन के दौरान नियमों का उल्लंघन करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। इसमें जरूरत पड़ने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई करने का अनुरोध भी शामिल है।
4. शिकायतों पर लिए गए फैसलों का रिकॉर्ड रखा जाए
विपक्ष की मांग है कि SIR से संबंधित शिकायतों और याचिका में उठाए गए मुद्दों पर चुनाव आयोग उचित निर्णय ले। साथ ही, प्रत्येक फैसले को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार दर्ज किया जाए, जिससे बाद में उसकी समीक्षा की जा सके।
5. ऑनलाइन फॉर्म-6 के नियमों का पालन हो
याचिका में मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले ऑनलाइन फॉर्म-6 को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें मांग की गई है कि फॉर्म और उससे जुड़ी प्रक्रिया मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के अनुरूप हो।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाए बिना फॉर्म या पंजीकरण व्यवस्था में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
6. मतदाता सूची और EVM की स्वतंत्र जांच कराई जाए
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है। प्रस्तावित समिति में तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य प्रतिष्ठित लोगों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है।
इस समिति से SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने और सूची में किए गए संशोधनों की जांच कराने की मांग है। साथ ही ECINET और ERONET डेटाबेस तक पहुंच तथा EVM के तकनीकी डिजाइन, संरचना, नीतियों और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं की समीक्षा का अनुरोध किया गया है।
7. हटाए गए मतदाताओं के नाम और कारण सार्वजनिक हों
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बूथवार जानकारी सार्वजनिक की जाए। प्रत्येक नाम हटाने का कारण बताया जाए और उपलब्ध आंकड़ों को उम्र तथा लिंग के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाए।
इसके अलावा, जिन योग्य मतदाताओं के नाम सूची से हट गए हैं, उन्हें दोबारा शामिल करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
8. नोटिस और सुनवाई के बिना नाम नहीं हटाए जाएं
याचिका में यह सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नियमानुसार नोटिस दिया जाए और अपना पक्ष रखने का अवसर मिले।
साथ ही, पंजाब और अन्य संबंधित राज्यों में योग्य नागरिकों को निर्धारित समयसीमा के भीतर मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करने का अवसर देने की मांग भी की गई है।
9. देशभर में SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगे
याचिका की प्रमुख मांगों में सभी राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाना भी शामिल है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया है कि जब तक इस प्रक्रिया की वैधता और उससे जुड़े विवादों पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक इसे रोकने पर विचार किया जाए।
विपक्ष का तर्क है कि ऐसा कदम योग्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। हालांकि, यह याचिकाकर्ताओं की मांग है, अदालत का घोषित फैसला नहीं।
10. मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए अन्य उचित आदेश
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया है कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत अन्य जरूरी निर्देश जारी करे। इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया गया है।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर रोक लगा दी है?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि याचिका में की गई मांगों और अदालत के आदेश के बीच अंतर समझना जरूरी है। SIR पर रोक, रिकॉर्ड पेश करने, स्वतंत्र ऑडिट कराने और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई जैसी बातें याचिकाकर्ताओं की ओर से मांगी गई राहतें हैं।
केवल याचिका दाखिल होने से ये मांगें लागू नहीं हो जातीं। किसी मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया है, इसकी पुष्टि संबंधित मामले के आधिकारिक आदेश या नवीनतम अदालती कार्यवाही से ही की जानी चाहिए।
नोट: यह खबर याचिका में बताई गई मांगों के आधार पर तैयार की गई है। इसे सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले या जारी निर्देश के रूप में न समझें।


