लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़: उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रितों की नियुक्ति प्रक्रिया में लापरवाही को लेकर शासन ने सख्ती दिखाई है। प्रदेश के 54 जिलों में ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया का पहला चरण पूरा नहीं होने पर संबंधित संयुक्त शिक्षा निदेशकों (JD) और जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई है। अधिकारियों को जल्द से जल्द लंबित प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि लापरवाही के कारण नियुक्तियों में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
मृतक आश्रितों को नौकरी देने की प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए मानव संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गई है। इसके बावजूद कई जिलों से जरूरी विवरण उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसी को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने नाराजगी जताई है।
मानव संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन होगी पूरी प्रक्रिया
माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल की ओर से जारी पत्र में मृतक आश्रितों की नियुक्ति से संबंधित ऑनलाइन प्रक्रिया में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की गई है। निर्देशों के मुताबिक, 31 मई के बाद मृतक आश्रितों की भर्ती के लिए आवेदन और उनके निस्तारण से जुड़ी प्रक्रिया मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन की जानी है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और आवेदनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाना है। इसके लिए संबंधित नियुक्ति प्राधिकारियों को ऑनलाइन लॉगिन और पासवर्ड के जरिए आवेदनों को अनुमोदित कर अगले चरण में भेजना होगा।
54 जिलों में पहले चरण का काम अधूरा
मृतक आश्रित नियुक्ति प्रणाली के तहत आवेदनों को संबंधित मृतक कर्मचारी के अंतिम रिपोर्टिंग कार्यालय तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए संबंधित कार्यालयों और निदेशालयों के ऑफिस एडमिन को आवश्यक कार्रवाई पूरी करनी है।
विभागीय निर्देशों के अनुसार, जिन कार्यालयों के ऑफिस एडमिन निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं करेंगे, वहां मृतक आश्रितों के आवेदन ऑनलाइन आगे नहीं बढ़ सकेंगे। इसका असर नियुक्ति प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
इसी कारण 54 जिलों के संबंधित अधिकारियों को जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही वाले जिलों में लखनऊ, उन्नाव, कानपुर नगर, कानपुर देहात, रायबरेली, अंबेडकर नगर, सुलतानपुर और बाराबंकी समेत अन्य जिले शामिल बताए गए हैं।
लापरवाही पर तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही
विभाग ने स्पष्ट किया है कि मृतक आश्रितों की नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया में देरी को गंभीरता से लिया जा रहा है। संबंधित अधिकारियों को पोर्टल पर लंबित कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
यदि प्रशासनिक लापरवाही के कारण पात्र आवेदकों की नियुक्ति प्रक्रिया बाधित होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस कदम का उद्देश्य लंबित मामलों को आगे बढ़ाना और पात्र परिवारों को समय पर नियुक्ति प्रक्रिया का लाभ दिलाना है।
मृतक आश्रित नियुक्ति पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला
मृतक आश्रितों की नियुक्ति से जुड़े कानूनी पहलू भी चर्चा में हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सपना सारस्वत की याचिका पर सुनवाई करते हुए अनुकंपा नियुक्ति की प्रकृति को लेकर महत्वपूर्ण व्यवस्था दी थी।
मामले में अदालत ने नियुक्ति की शर्तों और सेवा की प्रकृति से जुड़े सवाल पर विचार किया। याचिका आगरा की रहने वाली सपना सारस्वत की ओर से दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान याची पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कमल कुमार केशरवानी और राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अमित सक्सेना ने पक्ष रखा।
इस मामले में अदालत की टिप्पणी का सटीक दायरा समझने के लिए मूल निर्णय और उसकी शर्तों का संदर्भ देखना जरूरी है। मृतक आश्रित नियुक्तियों में नियमित पद, सेवा की शर्तें और नियुक्ति पत्र में दर्ज प्रावधान संबंधित नियमों तथा न्यायिक आदेश के अनुसार तय होते हैं।
पात्र अभ्यर्थियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?
मानव संपदा पोर्टल पर प्रक्रिया पूरी नहीं होने से संबंधित आवेदनों के आगे बढ़ने में देरी हो सकती है। ऐसे में 54 जिलों के अधिकारियों को जारी चेतावनी को लंबित मामलों के निस्तारण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
अब संबंधित जिलों में ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी होने और आवेदनों के अगले चरण में पहुंचने पर नजर रहेगी। हालांकि, सभी लंबित मामलों के निस्तारण और नियुक्ति की समयसीमा को लेकर विभाग की ओर से जारी आधिकारिक निर्देशों की पुष्टि जरूरी है।


