लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच सियासी पोस्टर वॉर शुरू हो गया है। राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई शहरों में समाजवादी पार्टी और पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है। पोस्टर पर लिखा है- ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’।
इसके अलावा कुछ पोस्टरों में ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ जैसे नारे भी लिखे गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक लखनऊ के अलावा उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर समेत कई इलाकों में ऐसे पोस्टर नजर आए हैं। हालांकि, अभी तक इन पोस्टरों को लगाने वाले व्यक्ति या संगठन की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है।
चुनाव से पहले फिर उठा माफिया का मुद्दा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपराध और माफिया का मुद्दा पहले भी चुनावी बहस का हिस्सा रहा है। इस बार पोस्टरों के जरिए अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान के नामों को अखिलेश यादव और सपा से जोड़ने की कोशिश की गई है।
लोकसभा चुनाव 2024 से पहले भी भाजपा नेताओं ने इन नामों का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी पर राजनीतिक हमले किए थे। अप्रैल 2024 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव और इन तीनों नेताओं का जिक्र किया था।
अतीक और मुख्तार की हो चुकी है मौत
अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की अप्रैल 2023 में प्रयागराज में पुलिस सुरक्षा के बीच गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वहीं, मुख्तार अंसारी की मार्च 2024 में बांदा मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया था।
आजम खान लंबे समय से अलग-अलग मामलों को लेकर कानूनी कार्रवाई का सामना करते रहे हैं और उन्हें कई मामलों में सजा भी हो चुकी है।
2022 चुनाव में उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड का मुद्दा
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान उम्मीदवारों के चुनावी हलफनामों का विश्लेषण किया था। अलग-अलग चरणों में ADR की रिपोर्टों के मुताबिक कई प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी हलफनामों में घोषित की थी। उदाहरण के लिए, पहले चरण में 615 उम्मीदवारों के हलफनामों के विश्लेषण में 156 उम्मीदवारों ने आपराधिक मामले घोषित किए थे।
पांचवें चरण में ADR ने 685 उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण किया था। रिपोर्ट के मुताबिक 185 उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए थे, जिनमें 141 उम्मीदवारों ने गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए थे।
अंतिम चरण में 607 उम्मीदवारों के हलफनामों के विश्लेषण में 170 उम्मीदवारों ने आपराधिक मामले घोषित किए थे, जबकि 131 उम्मीदवारों ने गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए थे।
पोस्टर से किसे निशाना बनाया गया?
ताजा पोस्टरों में सीधे तौर पर अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को निशाना बनाया गया है। हालांकि, इन पोस्टरों के पीछे कौन है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए पोस्टरों पर लिखे आरोपों को किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति का स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
चुनाव से पहले इस तरह के पोस्टर सामने आने से उत्तर प्रदेश में माफिया, अपराध और कानून-व्यवस्था का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस में आने की संभावना है।


