Monday, August 10, 2026

Buy now

spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Lucknow-Kanpur Expressway: खुलते ही बदनामी का हाईवे बना लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, एक्सपेंशन ज्वाइंट में खतरनाक दरार

Lucknow-Kanpur Expressway: उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। एक्सप्रेसवे पर अब गड्ढों और सड़क की उखड़ती परत के अलावा एक्सपेंशन ज्वाइंट, डिवाइडर और क्रैश बैरियर की सुरक्षा को लेकर भी चिंता सामने आई है।

किलोमीटर 30 के आसपास एक्सपेंशन ज्वाइंट में लंबी दरार दिखाई देने के बाद सड़क निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों ने इसे गंभीर मामला बताया है। उनका कहना है कि अगर समय रहते इसकी मरम्मत नहीं की गई तो दरार बढ़ सकती है और सड़क के दूसरे हिस्सों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। इससे क्रैश बैरियर की मजबूती प्रभावित होने और वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा भी बढ़ सकता है।

बारिश के बाद और सामने आई एक्सप्रेसवे की खामी

रविवार को हुई बारिश के बाद सोमवार को एक्सप्रेसवे की स्थिति और खराब नजर आई। कई स्थानों पर पर्याप्त जल निकासी नहीं होने के कारण कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर पानी जमा दिखाई दिया।

सबसे चिंताजनक स्थिति किलोमीटर 30 के आसपास बताई जा रही है। यहां सड़क के एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक्सपेंशन ज्वाइंट किसी भी सड़क या पुल की संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसमें होने वाली क्षति को लंबे समय तक नजरअंदाज करना सड़क की संरचनात्मक मजबूती के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

इसी क्षेत्र में डिवाइडर में भी दरार दिखाई दी। इसके अलावा किमी 30.1 पर RCC से बने डिवाइडर में बीच से दरार आने की बात सामने आई है। इसका असर सड़क की सतह पर भी दिखाई दिया और वहां भी क्रैक नजर आया।

सड़क से लेकर सुरक्षा ढांचे तक सवाल

एक्सप्रेसवे पर सामने आ रही खामियां केवल सड़क की ऊपरी सतह तक सीमित नहीं दिखाई दे रही हैं। डिवाइडर और सुरक्षा बैरियर के आसपास भी क्षति की स्थिति सामने आई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी क्षतिग्रस्त हिस्से पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है या कोई वाहन डिवाइडर अथवा क्रैश बैरियर से टकराता है तो नुकसान बढ़ सकता है। ऐसे में इन हिस्सों की तत्काल तकनीकी जांच और आवश्यक मरम्मत जरूरी है।

मरम्मत के 48 घंटे बाद फिर उखड़ी सड़क

एक्सप्रेसवे पर पहले से क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। किलोमीटर 63.8 और 63.9 के आसपास सड़क पर दोबारा दरार और गड्ढे जैसी स्थिति दिखाई दी।

बताया जा रहा है कि शनिवार को ही इन हिस्सों में मरम्मत का काम कराया गया था, लेकिन करीब 48 घंटे के भीतर मरम्मत वाले स्थान पर डामर की परत फिर से खराब होती नजर आई।

इससे मरम्मत की गुणवत्ता और सड़क के नीचे मौजूद संरचना को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक सिर्फ ऊपर से डामर डालकर समस्या का समाधान करने के बजाय सड़क के बेस, जल निकासी और पूरी संरचना की जांच जरूरी है।

ड्रेनेज सिस्टम सुधारने के लिए सड़क किनारे ड्रिलिंग

एक्सप्रेसवे की मौजूदा स्थिति में खराब जल निकासी व्यवस्था को भी अहम कारण माना जा रहा है। बारिश के पानी की पर्याप्त निकासी नहीं होने से पानी सड़क के आसपास और नीचे जमा हो सकता है। इससे सड़क की सतह और उसके बेस की मजबूती प्रभावित होने की आशंका रहती है।

इसी समस्या को दूर करने के लिए किलोमीटर 57.5 के आसपास ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार का काम किया जा रहा है। यहां कर्मचारी ड्रिल मशीन की मदद से सड़क के किनारे छेद करते दिखाई दिए, ताकि जमा पानी को बाहर निकलने का रास्ता मिल सके।

कर्मचारियों के मुताबिक, पानी की निकासी की समस्या को देखते हुए यह काम किया जा रहा है।

निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव पर उठे सवाल

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को बेहतर और तेज कनेक्टिविटी के उद्देश्य से तैयार किया गया था। लेकिन कम समय में सड़क की सतह, जल निकासी, एक्सपेंशन ज्वाइंट और डिवाइडर में खामियां सामने आने से इसके निर्माण और रखरखाव पर सवाल उठ रहे हैं।

अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित एजेंसियां एक्सप्रेसवे की संरचनात्मक सुरक्षा, ड्रेनेज सिस्टम, एक्सपेंशन ज्वाइंट, डिवाइडर और क्रैश बैरियर की व्यापक तकनीकी जांच कराएं, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले खामियों को दूर किया जा सके।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

1,388FansLike
133FollowersFollow
621SubscribersSubscribe
- Advertisement -[cricket_score]

Latest Articles