अयोध्या/सर्वोदय न्यूज़: राम मंदिर दान चोरी मामले में विवादों के बीच ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे चुके चंपत राय का एसआईटी को भेजा गया एक कथित पत्र सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल इस पत्र में दावा किया गया है कि दान की गणना (SoP) से जुड़े दिशा-निर्देशों पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। साथ ही उन्होंने कहा है कि दान की गिनती की प्रक्रिया ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारियों ने तय की थी।
SoP से असहमति जताने का दावा
कथित पत्र के अनुसार, 6 फरवरी 2025 को दान की गणना के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure-SoP) तैयार की गई थी। इस दस्तावेज पर ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और भारतीय स्टेट बैंक की अयोध्या शाखा के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक गोविंद मिश्रा के हस्ताक्षर बताए गए हैं।
पत्र में दावा किया गया है कि इसकी प्रति महासचिव को भेजे जाने का उल्लेख जरूर है, लेकिन उन्हें इस दस्तावेज की जानकारी 13 जून 2026 को अपने अकाउंट कार्यालय से मिली। उन्होंने पत्र में इस SoP से असहमति जताते हुए इसे स्वीकार करने से इनकार किया है।
‘मेरे हस्ताक्षर क्यों नहीं कराए गए?’
कथित पत्र में यह भी कहा गया है कि अगस्त 2020 से जून 2026 के बीच हुए सभी महत्वपूर्ण अनुबंधों पर उनके और संबंधित पक्ष के अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर मौजूद हैं। ऐसे में दान की गणना से जुड़े इतने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों पर उनके हस्ताक्षर नहीं कराए जाने पर सवाल उठाया गया है। पत्र में कहा गया है कि यदि उस समय वे अयोध्या में मौजूद नहीं थे, तो उनके लौटने तक इंतजार किया जाना चाहिए था।
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में उठे सवाल
दान चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में दान की गणना प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन ट्रस्ट पर तय नियमों का पूरी तरह पालन नहीं करने और बाद में उन्हें शिथिल करने का उल्लेख किया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था के पालन पर भी सवाल
एसआईटी के अनुसार, मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए ट्रस्ट ने निजी सुरक्षा एजेंसी एसआईएस (SIS) के साथ अनुबंध किया था। गणना कक्ष के बाहर एजेंसी का एक सुरक्षा कर्मी तैनात रहता था, जिसकी जिम्मेदारी पूरी गणना प्रक्रिया की निगरानी करना थी। जांच में पाया गया कि इस व्यवस्था का प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया गया।
तलाशी संबंधी नियमों में किया गया बदलाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी 2024 में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच हुए एमओयू के अनुसार, चढ़ावे की राशि की गणना और बैंक तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी ट्रस्ट की थी। इसके तहत गणना कक्ष में प्रवेश और बाहर निकलने वाले सभी कर्मचारियों की सुरक्षा जांच अनिवार्य थी।
हालांकि, 6 फरवरी 2025 को जारी नए दिशा-निर्देशों में इस व्यवस्था में बदलाव किया गया। पहले जहां हर व्यक्ति की नियमित तलाशी का प्रावधान था, वहीं बाद में इसे बदलकर केवल आकस्मिक (रैंडम) तलाशी तक सीमित कर दिया गया। एसआईटी ने इसी बदलाव को भी जांच का अहम बिंदु माना है।



