न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट विकसित करने की महत्वाकांक्षी AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) परियोजना के लिए निजी कंपनियों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कदम को भारत की सैन्य ताकत बढ़ाने के साथ-साथ चीन और पाकिस्तान के लिए बड़ा रणनीतिक संदेश माना जा रहा है।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय और एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) ने तीन निजी कंपनियों और कंसोर्टियम को अनुरोध प्रस्ताव (RFP) भेजे हैं। इनमें Tata Advanced Systems, Larsen & Toubro–Bharat Electronics Limited कंसोर्टियम और Bharat Forge–BEML-डेटा पैटर्न कंसोर्टियम शामिल हैं।
HAL को नहीं किया गया शामिल
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे खास बात यह है कि सरकारी रक्षा कंपनी Hindustan Aeronautics Limited (HAL) को इस प्रोजेक्ट की दौड़ से बाहर रखा गया है। माना जा रहा है कि सरकार अब रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भूमिका को तेजी से बढ़ाना चाहती है।
15 हजार करोड़ रुपये की परियोजना
चुनी गई कंपनी को करीब 15 हजार करोड़ रुपये की लागत से AMCA के पांच प्रोटोटाइप तैयार करने होंगे। सरकार का लक्ष्य है कि ये प्रोटोटाइप वर्ष 2031 तक तैयार हो जाएं। इसके बाद भारतीय वायुसेना को अत्याधुनिक स्वदेशी लड़ाकू विमानों से लैस किया जाएगा।
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यह परियोजना भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम जैसे HAL Tejas को और मजबूती देने वाली मानी जा रही है।
क्या है स्टील्थ फाइटर जेट?
स्टील्थ फाइटर जेट ऐसे आधुनिक लड़ाकू विमान होते हैं जिन्हें दुश्मन के रडार और निगरानी सिस्टम से बचकर उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया जाता है। इन विमानों में खास तरह की तकनीक, डिजाइन और सामग्री का इस्तेमाल होता है जिससे इनकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
दुनिया में अमेरिका का Lockheed Martin F-35 Lightning II और Lockheed Martin F-22 Raptor, चीन का Chengdu J-20 और रूस का Sukhoi Su-57 इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
दुश्मन के इलाके में कर सकते हैं सटीक हमला
स्टील्थ फाइटर जेट आधुनिक युद्ध में बेहद अहम माने जाते हैं क्योंकि ये दुश्मन के इलाके में आसानी से घुसकर हमला करने में सक्षम होते हैं। इनमें अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक, हाई-टेक सेंसर और आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम लगाए जाते हैं।
हालांकि स्टील्थ तकनीक किसी विमान को पूरी तरह अदृश्य नहीं बनाती, लेकिन उसकी पहचान और ट्रैकिंग को बेहद कठिन जरूर बना देती है। यही वजह है कि दुनिया के कई देश अब अपनी वायुसेना को मजबूत करने के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने पर जोर दे रहे हैं।



