अपर्णा यादव के घर पहुंचे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रतीक यादव को दी श्रद्धांजलि

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- लखनऊ में समाजवादी पार्टी संस्थापक Mulayam Singh Yadav के पुत्र और भाजपा नेता Aparna Yadav के पति प्रतीक यादव के निधन के बाद शोक का माहौल बना हुआ है। इसी बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav बुधवार को लखनऊ पहुंचे और अपर्णा यादव के आवास पर जाकर दिवंगत प्रतीक यादव को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान भाजपा के मध्य प्रदेश प्रभारी और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री Mahendra Singh भी उनके साथ मौजूद रहे।

मोहन यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रतीक यादव बेहद सरल स्वभाव के व्यक्ति थे और उनका असमय निधन परिवार के साथ-साथ शुभचिंतकों के लिए भी गहरा आघात है।

किचन में बेहोश मिले थे प्रतीक यादव

जानकारी के अनुसार, प्रतीक यादव बुधवार सुबह विक्रमादित्य मार्ग स्थित अपने आवास के किचन में बेहोशी की हालत में मिले थे। घरेलू कर्मचारी की सूचना पर उन्हें तत्काल सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि फेफड़े की मुख्य नस में खून का थक्का फंसने के कारण शरीर में ऑक्सीजन का स्तर अचानक कम हो गया, जिससे उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने आगे की जांच के लिए हार्ट और विसरा सुरक्षित रख लिया है।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और फोरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल की और जरूरी साक्ष्य एकत्र किए।

अंतिम दर्शन के दौरान भावुक हुआ परिवार

अंत्येष्टि के दौरान जब प्रतीक यादव की बेटियों को अंतिम दर्शन के लिए बुलाया गया तो वे पिता को चिता पर देखकर भावुक हो गईं। परिवार और रिश्तेदारों ने उन्हें संभाला। अंतिम संस्कार की रस्म उनके ससुर ने निभाई।

बेजुबान पशुओं के लिए समर्पित था जीवन

प्रतीक यादव पशु प्रेम के लिए भी जाने जाते थे। खासकर गायों और आवारा पशुओं के संरक्षण को लेकर वे लगातार सक्रिय रहते थे। नगर निगम के अमौसी स्थित कान्हा उपवन गौशाला में उनके प्रयासों की झलक साफ दिखाई देती है।

नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, प्रतीक यादव ने गौशाला में गायों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई थी। गर्मी से राहत दिलाने के लिए वहां कूलर और पंखे लगवाए गए थे, साथ ही हरे चारे की नियमित व्यवस्था भी सुनिश्चित कराई गई थी। वह समय-समय पर गौशाला पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी करते थे।

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