लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर सोमवार को अपने सरकारी आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और नागरिकों के कल्याण का आधार है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता के प्रति हर सरकारी संस्था, मंत्रालय और विभाग को अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 1950 में लागू हुआ संविधान आज भी ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त बना रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में लिखा गया वाक्य ‘हम भारत के लोग’ हर नागरिक को अधिकारों और कर्तव्यों की याद दिलाता है। यदि संविधान का वास्तविक संरक्षक कोई है, तो वह देश का आम नागरिक है, इसलिए शासन-प्रशासन को पूरी तरह जनउत्तरदायी होना चाहिए।
न्याय, समता और बंधुता विकसित भारत की नींव
सीएम योगी ने संविधान के तीन मूल सिद्धांत—न्याय, समता और बंधुता—पर विशेष बल देते हुए कहा कि जब समाज के हर वर्ग को बिना किसी भेदभाव के न्याय मिलेगा और समानता का भाव मजबूत होगा, तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘विकसित भारत’ का सपना साकार हो सकेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का विकास तभी संभव है जब अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति भी खुशहाल हो।
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राष्ट्रनायकों को श्रद्धांजलि, विभाजनकारी सोच पर प्रहार
मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस को नमन करते हुए कहा कि देश को आजादी से पहले और बाद में जाति, भाषा और क्षेत्र के नाम पर बांटने के कई प्रयास किए गए, लेकिन संविधान की मूल भावना ने हर साजिश को विफल किया।
संविधान से ऊपर कोई नहीं
सीएम योगी ने सख्त संदेश देते हुए कहा कि लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति खुद को कानून, संविधान या व्यवस्था से ऊपर नहीं मान सकता। उन्होंने कहा कि यदि कोई यह सोचता है कि उसकी बात ही अंतिम सत्य है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है और संविधान का अपमान है।
‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना जरूरी
मुख्यमंत्री ने ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि भारतीय संविधान कठिन परिस्थितियों में भी देश को दिशा देने वाला मार्गदर्शक रहा है। यह हमें सबको साथ लेकर चलने और सामूहिक विकास की प्रेरणा देता है।



