2020 में सामने आया था मामला
यह मामला वर्ष 2020 में प्रकाश में आया था। जांच एजेंसियों को सूचना मिली थी कि मासूम बच्चों का यौन शोषण कर उनके अश्लील वीडियो तैयार किए जा रहे हैं और उन्हें विदेशी पोर्नोग्राफिक वेबसाइटों पर डार्क वेब के माध्यम से अपलोड किया जा रहा है। बताया गया कि ये वीडियो 47 देशों तक पहुंच चुके थे।
सीबीआई ने संभाली जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई थी। इंटरपोल से मिली जानकारी के आधार पर सीबीआई ने जांच शुरू की। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, डिजिटल ट्रेल और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया गया।
50 से अधिक बच्चों को बनाया शिकार
जांच में खुलासा हुआ कि बांदा, चित्रकूट और बुंदेलखंड क्षेत्र के अन्य जिलों के कुल 34 से अधिक बच्चों के वीडियो बनाए गए। आरोप है कि आरोपियों ने बच्चों को बहलाकर उनका यौन शोषण किया और आर्थिक लाभ के लिए वीडियो अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर प्रसारित किए।
गवाहों को धमकाने का भी आरोप
अदालत के फैसले से पहले आरोपी रामभवन की पत्नी दुर्गावती को गवाहों को धमकाने और उन्हें प्रभावित करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस पर कुछ गवाहों को चुप रहने के लिए दबाव और प्रलोभन देने का आरोप लगा था।
अदालत का कड़ा रुख
विशेष पॉक्सो न्यायालय के न्यायाधीश ने मामले को ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ श्रेणी का मानते हुए दोनों मुख्य आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
इस फैसले को बाल संरक्षण कानूनों के तहत एक महत्वपूर्ण और सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।



