न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- मध्य पूर्व में संघर्ष खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ईरान ने शनिवार दोपहर कई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। यह कार्रवाई हालिया इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के हमलों के जवाब के तौर पर देखी जा रही है।
आठ देशों में अमेरिकी बेस निशाने पर
ईरान ने दावा किया है कि उसने कम से कम आठ देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत और इजरायल शामिल हैं।
बहरीन की ओर से कहा गया कि अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय को मिसाइलों से निशाना बनाया गया। कतर में भी धमाकों की आवाजें सुनी गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अबू धाबी और दुबई में भी तेज विस्फोटों की आवाज सुनाई दी। हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
मध्य पूर्व में अमेरिका के कई रणनीतिक सैन्य अड्डे हैं, जहां बड़ी संख्या में सैनिक और अत्याधुनिक हथियार तैनात हैं। इन ठिकानों पर हमला क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।
पहले अमेरिका-इजरायल ने किया था हमला
इससे पहले शनिवार को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के विभिन्न ठिकानों पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की थी। राजधानी तेहरान के डाउनटाउन इलाके में हुए हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के आवासीय परिसर को भी निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई थी। हालांकि उस समय वह परिसर में मौजूद थे या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
ट्रंप का कड़ा बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में ईरानी शासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ईरानी नेतृत्व वर्षों से अमेरिका विरोधी गतिविधियों में शामिल रहा है। ट्रंप ने ईरानी नागरिकों से अपील की कि वे हमलों के दौरान सुरक्षित स्थान पर जाएं, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि भविष्य में शासन परिवर्तन की संभावना ईरान के लोगों के हाथ में है।
रिवोल्यूशनरी गार्ड का जवाब
ईरान की पैरामिलिट्री इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि उसने इजरायल की ओर ड्रोन और मिसाइलों की पहली खेप दागी है। यह हमले क्षेत्र में संघर्ष के और व्यापक होने का संकेत दे रहे हैं।
हूतियों की चेतावनी
इस बीच हूती आंदोलन के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे रेड सी शिपिंग रूट और इजरायल के खिलाफ हमले फिर से शुरू कर सकते हैं। हालांकि, इस पर आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हमले और पलटवार जारी रहे तो पूरा मध्य पूर्व व्यापक युद्ध की चपेट में आ सकता है। अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सीधे हमले से अमेरिका की प्रतिक्रिया और अधिक आक्रामक हो सकती है। आने वाले घंटे क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।



