नई दिल्ली/इस्लामाबाद: Iran और United States के बीच Islamabad में चल रही शांति वार्ता के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Strait of Hormuz को पूरी तरह से खोलने में ईरान को गंभीर तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जल्दबाजी में बिछाई गईं समुद्री सुरंगें
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट में कहा गया है कि हालिया तनाव के दौरान ईरान ने जल्दबाजी में छोटी नावों के जरिए समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा दी थीं।
समस्या यह है कि इन सुरंगों का सटीक रिकॉर्ड नहीं रखा गया। कुछ सुरंगें ऐसी तकनीक से लैस हैं, जो समुद्री धाराओं के साथ अपनी जगह बदल सकती हैं। यानी जो रास्ता पहले सुरक्षित था, वह अब खतरनाक हो चुका है।
तकनीक और संसाधनों की कमी
ईरान के पास इन सुरंगों को खोजने और सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए पर्याप्त आधुनिक तकनीक और विशेष जहाजों की कमी बताई जा रही है। यही वजह है कि वह चाहकर भी पूरे जलमार्ग को तुरंत सुरक्षित नहीं बना पा रहा।
वार्ता में अहम मुद्दा बना जलमार्ग
इस्लामाबाद में चल रही बातचीत में ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi और अमेरिकी उपराष्ट्रपति J. D. Vance आमने-सामने हैं।
ईरान ने पहले कहा था कि तकनीकी सीमाओं को देखते हुए जलमार्ग खोला जाएगा, लेकिन अब साफ हो गया है कि ये सीमाएं दरअसल वही बिछाई गई सुरंगें हैं।
ट्रंप की शर्त और ईरान की मजबूरी
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने स्पष्ट किया है कि बातचीत आगे तभी बढ़ेगी जब जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल होगी। हालांकि मौजूदा हालात में ईरान के लिए यह शर्त तुरंत पूरी करना आसान नहीं है।
संकरा रास्ता खुला, लेकिन खतरा बरकरार
ईरान ने पूरे जलमार्ग को बंद नहीं किया है, बल्कि एक सीमित और संकरा रास्ता खुला रखा है। Islamic Revolutionary Guard Corps ने सुरक्षित मार्गों के चार्ट जारी किए हैं, लेकिन इनके आसपास अभी भी खतरा बना हुआ है।
बताया जा रहा है कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से ईरान टोल भी वसूल रहा है।
भारत समेत दुनिया की बढ़ी चिंता
दुनिया के करीब 20% तेल और एलएनजी का व्यापार इसी जलमार्ग से होता है। ऐसे में भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है।
युद्धविराम के बाद उम्मीद थी कि कतर समेत खाड़ी देशों से तेल और गैस की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी, लेकिन मौजूदा खतरे के कारण शिपिंग और बीमा कंपनियां जोखिम लेने से बच सकती हैं।
पूरी तरह सुरक्षित होने में लग सकता है लंबा समय
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और उसके सहयोगी माइन-स्वीपिंग तकनीक का इस्तेमाल भी करें, तब भी पूरे जलमार्ग को सुरक्षित बनाने में हफ्तों या महीनों का समय लग सकता है।



